पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • स्वाइन फ्लू: जिले में 6 और पॉजीटिव

स्वाइन फ्लू: जिले में 6 और पॉजीटिव

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सोजत। जिले में स्वाइन फ्लू के वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को एक साथ 6 और मरीजों को जांच में पॉजीटिव पाया गया। इनमें से 4 महिलाएं और 2 युवक हैं। जैतारण के बलूंदा गांव से 2 मरीज पॉजीटिव मिले हैं जिनमें एक 38 वर्षीय महिला एक 14 वर्षीय किशोर है।
वहीं रायपुर, बिराली (देसूरी) निंबोल की तीन महिलाओं के अलावा पाली के एक युवक को संक्रमित माना गया। जबकि बांगड़ अस्पताल से भेजे गए तीन मरीजों के स्वाब की जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी हैं। इनमें से दो का उपचार पाली में ही चल रहा है। इस सीजन में जिले में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में स्वाइन के संक्रमित मरीज सामने आए हैं। इनके साथ अब तक जिले में स्वाइन के संक्रमण का आंकड़ा भी बढ़कर 18 हो गया है। इनमें तीन की मौत हो चुकी है। हालांकि विभाग के पास केवल 15 मरीजों की सूचना ही है।

ये सामने आए नए मरीज : रायपुरनिवासी बछली देवी (55) पाली निवासी विकास अग्रवाल(30) बिराली, देसूरी निवासी गेहरी देवी(35) निंबोल निवासी सुखी देवी(35) बलूंदा निवासी गीता (38) अर्जुन(14) को स्वाइन पॉजीटिव आया है। सोमवार को रोहट निवासी 24 वर्षीय अश्विन को पॉजीटिव माना था।
सबसे पहले 22 जनवरी को स्वाइन की पहली मरीज देवली कलां की गीता नट सामने आई थी। उसकी मौत हो गई। नाडोल,देसूरी निवासी कानाराम, पाली की प्रेम देवी, लीला आयशा, जैतारण का चैनाराम, सोजत की रामीदेवी मारवाड़ जंक्शन का घेवरराम को संक्रमित माना गया। इनमें चैनाराम की मृत्यु हो चुकी है। कानाराम को भी मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

विभाग के पास इनकी जानकारी ही नहीं

स्वाइन से सादड़ी के एक युवक की मौत हुई। विभाग ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वह चित्तौड़गढ़ में संक्रमित हुआ और उदयपुर में उसकी मौत हुई। रोहट के खुंडावास में एक साल के बच्चे को भी स्वाइन पॉजीटिव आया। वहीं जालोर सीएमएचओ के अनुसार नाना बेड़ा निवासी रिंकू कंवर जांच में पॉजीटिव मिली।
यह महिला बाली में एक शादी समारोह में गई थी। उसके बाद उसने आहोर जालोर में जांच करवाई। इन दोनों ही मरीजों की जानकारी विभाग के पास नहीं है। ही इन क्षेत्रों में अब तक सर्वे हुआ।

अस्पताल में जाकर ही संक्रमित हो गया

रोहट के खुंडावास निवासी संक्रमित बालक के पिता कानसिंह की मानें तो करीब 10 दिन पहले उसकी बेटी एमडीएम अस्पताल में भर्ती हुई थी। वहां उसकी प|ी के साथ बेटा भी गया था। यहीं से वह संक्रमित हो गया। अब जोधपुर में उसका इलाज चल रहा है।

जिले के दिन रात के तापमान में करीब 3 गुना अंतर होने के कारण रात में सर्दी बनी हुई है। इससे स्वाइन फ्लू का वायरस बढ़ रहा है। यह स्थिति पूरी फरवरी तक रहेगा

कब तक रहता है वायरस

एच1एन1वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं। इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, एल्कोहल्स, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डवलप हो सकते हैं। लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।

2. किया क्या?

इस साल केस मौतें बढ़ी तो सर्वे फिर शुरू, मगर अभी भी सर्वे के नाम पर मात्र कर्मचारी घरों पर जाकर औपचारिकता ही कर रहे हैं।

4. फिर फैल रहा तो कमी कहां?

प्रशासन और मेडिकल विभाग में सामंजस्य नहीं है। सर्वे भी मरीज मिलने के बाद उसी एरिया का कराया जा रहा है, जबकि असर पूरे ब्लॉक में है।

3. ऐसा किया तो असर क्या?

जहां से मरीज आया, वहां सर्वे किया। टेमीफ्लू बांटी तो उस परिवार के दूसरे लोग चपेट में नहीं आए। मरीज चिह्नित हुए तो इलाज शुरू हो गया, अन्यथा जानकारी के अभाव में मौतें और बढ़तीं।

1. करना क्या चाहिए?

गांवों में टेमीफ्लू बांटने के साथ ही इलाज की सुविधा, जिले में व्यापक सर्वे चलाया जाए, मेडिकल प्रशासन की संयुक्त टीमें बनें, पटवारी ग्रामसेवकों की भी जिम्मेदारी तय हो, बांगड़ अस्पताल में जांच सुविधा संसाधन बढ़ाएं, स्टेशन बस स्टैंड पर तत्काल स्क्रीनिंग शुरू करें।

2015 अब तक 3 मौत, 15 अन्य पॉजीटिव मरीज मिले हैं

2014 28 संदिग्ध मरीज जरूर मिले थे, इसमें मात्र 6 लोग ही पॉजिटिव मिले

2013 स्वाइन फ्लू से 4 जनों की मौत हुई थी, 13 संक्रमित पाए गए थे।

जब परिवार का कोई सदस्य संक्रमित हो तो उसे अनिवार्य तौर पर घर के एक कमरे में अन्य लोगों से अलग रखें।

घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, दिन में कई बार हाथ धोएं।
रोगी की सेवा करने वाले सावधानी बरतें। मुंह पर टाइट सर्जिकल मास्क लगाएं। मरीज के कपड़ों को गर्म पानी में धोएं।

इनको बचाएं

सबसे ज्यादा 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को सावधानी रखनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं, 5 साल से कम उम्र के बच्चे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हुई हो तो सावधानी रखनी चाहिए।

कौन ले सकता है टेमीफ्लू

अगर किसी को सर्दी-जुकाम हो गया है और अगर तीन-चार दिन से दवाइयां लेने के पश्चात भी उसकी बीमारी ठीक नहीं हो रही है तो उसे डॉक्टर के परामर्श के बाद ही टेमी फ्लू टेबलेट लेनी चाहिए।

एलोपैथ, होम्योपैथ और आयुर्वेद में बचाव इलाज दोनों

आयुर्वेद

हल्का जुकाम, खांसी होने पर दिन में कई बार गर्म पानी का सेवन करें। दही, छाछ का उपयोग करने से बचें। दो चम्मच शहद, एक चम्मच अदरक का रस, आधा चम्मच तुलसी के पत्तों के रस का रोज सेवन करें।

होम्योपैथ

फ्लू से बचाव के लिए इनक्लूजिव, आर्सेनिक एलबम समेत अन्य प्रकार की दवाइयां को लगातार तीन दिन उपयोग करने से तीन माह तक स्वाइन फ्लू की संभावना नहीं रहेगी।

एलोपैथ

टेमीफ्लू टेबलेट एच1एन1 के खिलाफ काफी कारगर है। बुखार या सामान्य शरीर दर्द में एस्प्रिन लेने से बचें। फ्लू का आशंका हो तो गर्म पानी से गरारे करें।

स्वाइन के वायरस से संक्रमित मरीजों का लगातार आंकड़ा बढ़ने के बावजूद विभाग में समन्वय का अभाव, जिले के जो मरीज सीधे हायर सेंटर पहुंच रहे हैं उनकी जानकारी तक नहीं, विभाग अभी तक 3 मौत, 12 पॉजीटिव मान रहा है। विभाग जिलेभर में स्क्रीनिंग पूरी करने का दावा कर रहा है, बावजूद इसके नए मरीज सामने रहे हैं।

मंगलवार को जोधपुर के एमडीएम हॉस्पिटल से जारी जांच रिपोर्ट के अनुसार संभाग के 50 मरीजों को पॉजीटिव बताया गया जिनमें 6 पाली जिले के हैं। इनमें 4 महिलाएं 2 युवक हैं। नए संक्रमित मरीजों में बलूंदा की एक 38 वर्षीय महिला 14 साल का किशोर, रायपुर, निंबोल तथा देसूरी की 3 महिलाएं पाली का एक युवक शामिल है।