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प्रेमाराम निर्विराेध बने जिला प्रमुख

6 वर्ष पहले
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सोजत। जिला परिषद की 33 में से 32 सीटें जीतने के बाद जिला प्रमुख पद को लेकर 2 दिन से भाजपा में चल रही रस्साकशी पर शनिवार सुबह आलाकमान के एक मैसेज से विराम लग गया। छहों विधायक मल्लाराम और खीमाराम में से एक का नाम तय करना चाह रहे थे वहीं आलाकमान ने प्रेमाराम के तीसरे विकल्प पर मुहर लगा दी। यह नाम सांसद पीपी चौधरी की पसंद था। अचानक जयपुर से तय हुए इस नाम को लेकर एकबारगी सब हैरत में पड़ गए।

जिले के कई नेताओं का विरोध दरकिनार कर प्रेमाराम को जिला परिषद सदस्य का टिकट दिलवाने में भी सांसद की अहम भूमिका थी। आलाकमान के निर्देश के बाद प्रेमाराम निर्विरोध जिला प्रमुख चुन लिए गए। पार्टी के फैसले का सम्मान करते हुए दोनों दावेदार खीमाराम मल्लाराम उनके प्रस्तावक बने। भाजपा को जिला परिषद में 32 सीटें मिलने के बाद ही भाजपा से ही जिला प्रमुख पद पर निर्विरोध होना तय हो गया था।

इस पद को लेकर मतगणना के तत्काल बाद ही रानी क्षेत्र से खीमाराम चौधरी, जैतारण से मल्लाराम सीरवी तथा रायपुर इलाके के प्रेमाराम चौधरी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष अपनी दावेदारी जता दी थी।
तीनों की मजबूत दावेदारी को देखते हुए यहां पर पंचायतीराज मंत्री सुरेंद्र गोयल, सुमेरपुर विधायक जिलाध्यक्ष मदन राठौड़ समेत अन्य नेताओं ने एक राय बनाने का प्रयास भी किया था। इसको लेकर कई बार जिले के पदाधिकारियों ने कई बार अपने स्तर पर बैठक बुलाकर तीनों में से एक नाम पर सहमत नहीं होने पर ओबीसी वर्ग से ही किसी अन्य जाति के जिला परिषद सदस्य को उम्मीदवार बनाने की तैयारी कर ली थी।
दो दिन तक यह रस्साकशी चलती रही। शनिवार सुबह 8 बजे जिलाध्यक्ष मदन राठौड़ चुनाव प्रभारी मेघराज लोहिया को आलाकमान का मैसेज मिला। और प्रेमाराम चौधरी को उम्मीदवार घोषित किया गया।

नए जिला प्रमुख ने कहा स्वच्छता रहेगी प्राथमिकता : चुनावजीतने के साथ ही प्रेमाराम चौधरी ने अपनी प्राथमिकता भी साफ कर दी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं स्वच्छता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने का वादा किया। बालिका शिक्षा और पंचायती राज को और मजबूत करने के साथ उनके सामने आने वाली शिकायतों और समस्याओं के शीघ्र निपटारे की भी बात कही।

अब उप जिला प्रमुख को लेकर भाजपा की रणनीति : भाजपा की अब उप जिला प्रमुख भी निर्विरोध बनाने की रणनीति है। ओबीसी से जिला प्रमुख बनवाने के बाद अब सामान्य वर्ग या एससी वर्ग से किसी को मौका दिया जा सकता है। इसमें आशा कंवर, नवलकिशोर तथा विजयराम बावल के नाम चर्चाओं में हैं।

प्रेमाराम को पहली बार मिला बड़ा पद : प्रेमाराम चौधरी मूलत: पिपलिया गांव के रहने वाले हैं। 42 वर्षीय चौधरी करीब 20 साल से भाजपा में सक्रिय हैं। एक बार वे भाजपा के कृषि उपज मंडी प्रकोष्ठ से उपाध्यक्ष रह चुके हैं। अभी जिला उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में रायपुर पंचायत समिति से सदस्य का चुनाव लड़ा था, मगर वे हार गए थे। उत्तरप्रदेश से प्राइवेट छात्र के रूप में दसवीं तक पढ़ने वाले चौधरी को इस बार भाजपा ने जिला परिषद सदस्य का टिकट दिया, जिसमें वे जिले में सर्वाधिक वोटों से चुनाव जीते। भाजपा से अब वे जिला प्रमुख बने हैं।

लंदन में रहकर भी पैरवी, लौट आए सुबह ही : प्रेमाराम चौधरी को जिला प्रमुख बनाने में सांसद पीपी चौधरी की प्रमुख भूमिका रही। वे शुरू से ही प्रेमाराम चौधरी के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। गुरुवार शुक्रवार को लंदन दौरे पर होने के बाद भी वे लगातार सीएमओ तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समेत स्थानीय नेताओं से संपर्क में रहे।
शनिवार सुबह ही वे जोधपुर लौटे और तत्काल पाली पहुंच गए। जिला प्रमुख सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद प्रेमाराम को जिला परिषद सदस्य का टिकट दिलाने में भी उनकी अहम भूमिका रही थी। वार्ड 27 से एकबारगी सुनील सीरवी का टिकट लगभग तय हो चुका था।

शक्ति-प्रदर्शनभी काम नहीं आया : भाजपा में जिला प्रमुख पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे खीमाराम चौधरी मल्लाराम सीरवी ने तो वरिष्ठ नेताओं के समक्ष नवनिर्वाचित सदस्यों का संख्या बल भी दिखाया था। शुक्रवार रात एकबारगी तो ऐसा लग रहा था कि खीमाराम मल्लाराम में से कोई एक ही प्रत्याशी तय होगा। देर रात भाग्यश्री का नाम भी उछाला गया, लेकिन इन पर शनिवार सुबह विराम लग गया।

पहले दावेदार फिर आगे बढ़कर खीमाराम बने प्रस्तावक

प्रेमाराम को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद एकबारगी भाजपा में अंदर ही अंदर सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। इसको भांपते ही जिलाध्यक्ष मदन राठौड़ ने प्रेमाराम चौधरी के लिए जिला प्रमुख पद का नामांकन पत्र मंगवाया। पार्टी की भावनाओं का सम्मान करते हुए खीमाराम आगे आए और प्रस्तावक बने। इसके बाद मल्लाराम दूसरे प्रस्तावक बने। दोनों दावेदारों के प्रस्तावक बनने के बाद वरिष्ठ नेताओं ने राहत की सांस ली।

शैक्षणिक याेग्यता के दस्तावेजों को लेकर फिर उठा विवाद

प्रेमाराम के जिला प्रमुख बनते ही विरोधियों ने उनके खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया। उनके सदस्य पद के लिए नामांकन भरने के साथ ही उन पर आरोप लगाए गए थे कि उनकी दसवीं की अंकतालिका फर्जी है। उन्होंने यूपी बोर्ड से दसवीं उत्तीर्ण के दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं।
विरोधियों ने इसकी शिकायत जिला कलेक्टर रोहित कुमार गुप्ता को भी की थी। शिकायत के साक्ष्य में यूपी बोर्ड की दूसरी अंकतालिकाएं भी प्रस्तुत की गई थीं जिनमें एक ही वर्ष में बोर्ड सचिव के अलग-अलग नाम हस्ताक्षर थे। शनिवार को उनके जिला प्रमुख बनने के बाद एक बार फिर इस मार्कशीट को लेकर दिनभर राजनीतिक हल्कों में चर्चाओं का माहौल गरमाया रहा।

पंचायतीराज मंत्री सुरेंद्र गोयल कर रहे थे मल्लाराम की पैरवी, ज्यादातर विधायक चाह रहे थे खीमाराम को जिला प्रमुख बनाना, शनिवार सुबह जयपुर से आया आलाकमान का सांसद की पसंद प्रेमाराम को जिला प्रमुख प्रत्याशी बनाने का फरमान।

शोभा चौहान

क्षेत्र की 21 में से 21 सीटें जीतने के बाद से ही तय हो गया था कि कांग्रेस यहां से अपना कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं करेगी। भाजपा का प्रधान निर्विरोध बना।

रसाल कंवर

कांग्रेस ने इस क्षेत्र में जोड़तोड़ का प्रयास तो किया, लेकिन दांव नहीं चल पाया। भाजपा के बाड़ाबंदी करने से भाजपा ने 6 मताें से प्रधान चुनवा लिया।

नौरतन चौधरी

भाजपाके पास 15 में 12 सदस्य थे। यहां पर कांग्रेस ने उम्मीदवार तो मैदान में उतारा, लेकिन एक वोट क्रॉस होने के कारण नौरतन को 13 वोट मिले।

रश्मिसिंह

भाजपा के 15 में से 12 सदस्य होने के चलते उनका प्रधान तय था, कांग्रेस ने उम्मीदवार ही खड़ा नहीं किया। इसके चलते वे निर्विरोध निर्वाचित हो गई।

गिरिजा कंवर राठौड़

कांग्रेस को उलटफेर की उम्मीद थी। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। भाजपा नेताओं की रणनीति पूरी तरह से कारगर रही और 7 मतों से प्रधान पद हासिल किया।

भैराराम मीणा

कांग्रेस ने तो पहले ही वॉक ओवर दे दिया। भाजपा की पिस्ता मीणा ने प्रधान के लिए उम्मीदवारी जता दी। सिंबल भैराराम को मिलने से पिस्ता के मंसूबे धरे रह गए।

कपूराराम मेघवाल

यहां पर भाजपा के सामने कांग्रेस ने उम्मीदवार ही नहीं उतारा। भाजपा के कपूराराम मेघवाल बाली के इतिहास में पहली बार एससी वर्ग से प्रधान बन गए।

सुमेरसिंह कुंपावत

मारवाड़ जंक्शन में कांग्रेस के पास उम्मीदवारी जताने लायक बहुमत ही नहीं था। इसके चलते कुंपावत ने ही नामांकन भरा और वे निर्विरोध प्रधान बन गए।

राजेंद्रसिंह कोलीवाड़ा

भाजपा को यहां पर प्रधान बनाने के लिए पसीना गया। पहले करणसिंह नेतरा को टिकट देने की मंशा थी, मगर बगावत के डर से कोलीवाड़ा को टिकट दिया।

श्रवण बंजारा, भाजपा

भाजपा के पास बहुमत तो था। साथ ही कांग्रेस में आपसी फूट का भी लाभ मिला। दो सदस्यों के नहीं पहुंचने से उनकी जीत का आंकड़ा बढ़ गया।