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शिक्षक भर्ती में चयनित से अधिक अंक होने के बाद भी कविता को नहीं मिली नियुक्ति

4 वर्ष पहले
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2012में कांग्रेस सरकार के समय प्रदेशभर में हुई 40 हजार शिक्षकों की भर्ती के बाद जिला परिषद शिक्षा विभाग द्वारा की गई अनियमितताएं 5 साल बाद भी बंद होने का नाम नहीं ले रही है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनसे कम अंक आने के बाद भी कई अभ्यर्थी नौकरी कर रहे हैं, जबकि वो अभी भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे है। चौंकाने वाली बात यह कि नियुक्ति को लेकर करीब 5 साल भटकने के बाद हाईकोर्ट ने फरवरी माह में नियुक्ति के आदेश भी दिए। इसके बाद भी अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी गई है। इसको लेकर जिला परिषद शिक्षा विभाग खुद भी रिक्त पद नहीं होने का हवाला देते हुए नियुक्ति रोक रहे है। कविता चौधरी के पिता ओमप्रकाश ने बताया कि जिला परिषद के अधिकारी स्कूल में पद रिक्त नहीं होने का बहाना करके नियुक्ति रोक रहे हैं।

5 साल पहले भर्ती अब तक भटक रहे अभ्यर्थी

2012में प्रदेशभर में 40 हजार शिक्षकों की भर्ती निकली थी। इसके बाद आरटेट में छूट देने को लेकर मामला कोर्ट मे चला गया। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल रही है। वही करीब 5 साल से यह अभ्यर्थी कभी शिक्षा विभाग तो कभी जिला परिषद के चक्कर काट रहे है, लेकिन इनको न्याय नहीं मिल रहा है।

कोर्ट का आदेश भी नहीं मान रहे

अभ्यर्थीकविता ने इसको लेकर हाईकोर्ट में अपील की। इसके बाद हाईकोर्ट ने 9 फरवरी 2017 को आदेश देकर कविता चौधरी को नियुक्ति देने के निर्देश दिए। आदेश की एक कॉपी कविता ने जिला परिषद में जमा भी कराई। इसके बाद भी कविता को जिला परिषद शिक्षा विभाग की और से नियुक्ति नहीं दी गई।

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सोजतनिवासी कविता चौधरी पुत्र ओमप्रकाश जाट ने 2012 में जिला परिषदों के माध्यम से हुई शिक्षक भर्ती परीक्षा में भाग लिया। कविता चौधरी ने बताया कि उसके ओबीसी महिला वर्ग में प्रतीक्षा सूची में 10वां स्थान था। ओर उसके 109.59 अंक है। कविता ने बताया कि प्रियंका चौधरी के ओबीसी महिला वर्ग में उसे कम 108.59 अंक है। इसके बाद भी वो शिक्षक पद पर नियुक्त है। लेकिन उसको नियुक्ति नहीं दी गई।

कोर्ट का आदेश भी इसके बाद भी 4 महीने से भटक रही है

सोजतनिवासी कविता चौधरी ने अपने से कम अंक आने के बाद भी अभ्यर्थियों के चयन होने पर खुद कोर्ट गई। कोर्ट ने 9 फरवरी 2017 को आदेश भी दे दिया। इस आदेश की प्रति जिला परिषद में जमा कराने के बाद भी अब तक नियुक्ति को तरस रही है कविता।

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