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डीटीओ ने कैशियर को दे रखे थे पासवर्ड

7 वर्ष पहले
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पिछले दिनों चूरू सुजानगढ़ के जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) में शातिराना तरीके से हुए लाखों रुपए के गबन मामले में कई तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि चूरू सुजानगढ़ डीटीओ ने केशियर को अपने पासवर्ड दे रखे थे। ऐसी स्थिति में केशियर अपने स्तर पर ही रसीदों को कंप्यूटर से डिलिट कर देता था। इस कारण केशबुक आरसीआर की जांच में यह सब कुछ पकड़ में नहीं पाया।

गबन मामले के जांच अधिकारी (आरटीओ) ने जांच रिपोर्ट में दोनों जगह के डीटीओ को विभागीय आदेशों की पालना सुनिश्चित नहीं करने और निरस्त रसीदों को समुचित जांच नहीं करने सहित पर्यवेक्षण में कमी रहने की टिप्पणी की है। डीटीओ की ओर से अपना पासवर्ड केशियर को दिए जाने के कारण गबन की पृष्ठभूमि बनी। गबन करने में कर्मचारी ने तकनीकी का प्रयोग कर गबन किया। जांच में पता लगा है कि जिन अवधि में गबन हुआ था, उस समय जो-जो डीटीओ रहे उन्होंने अपने पासवर्ड इन्हें दे रखें थे।

इसतरीके से बच सकता था गबन

जांचरिपोर्ट में बताया गया कि डीटीओ के पासवर्ड केशियर को नहीं दिए जाते तो रसीदे डीलीट नहीं हो पाती। इसके अलावा-विभागीय आदेशों के अनुसार आरटीओ डीटीओ में होने वाले सभी कार्यों के लिए राशि जमा की मूल रसीद प्राप्त कर उसका कार्यालय के आरसीआर से लेखाकर्मी द्वारा सत्यापन किए जाने के बाद ही आगे की कार्यवाही किए जाने के आदेश दिए हुए हैं उपरोक्त अवधि में यदि मूल रसीद का आरसीआर के मिलान बाद ही आगे की कार्रवाई संपन्न होती तो गबन रोका जा सकता था। रसीद निरस्त किए जाने से पूर्व सक्षम स्वीकृति प्राप्ति की व्यवस्था का अभाव रहा और निरस्त रसीदों की समुचित जांच निर्देशानुसार लेखा संधारण नहीं किया जाना।

इस अवधि में हुए थे गबन

चूरूडीटीओ में अप्रैल 2010 से जनवरी 2014 तक की अवधि में 46 लाख 80 हजार 889 रुपए का गबन हुआ था। सुजानगढ़ डीटीओ के लेखों की विशेष जांच अवधि 16 फरवरी 2013 से 18 मार्च 2014 में 14 लाख 276 रुपए का गबन हुआ था। दोनों जगह रोकड़पाल शुभम यादव अनुज स्वामी ने अलग-अलग अवधि में राजस्व प्राप्ति के बाद जारी रसीदों को डीलीट कर गबन किया।

क्या-क्या लिखा गया जांचरिपोर्ट में

जांचरिपोर्ट में लिखा गया है कि विशेष जांच अवधि में कार्यरत रहे रोकड़पालों ने जानबूझ कर योजनाबद्ध तरीके से राजकीय राशि का गबन किया। कार्यालय में होने वाले वित्तीय समव्यवहारों पर