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परमार्थ सत्य पर चलें

7 वर्ष पहले
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कथावाचकआचार्य बृजेशकृष्ण ने कहा िक भगवान सर्वव्याप्त है केवल मात्र उनका नाम ही संसार में सबसे बड़ा है, िजससे मनुष्य को दुख कष्टों से छु़टकारा मिलता है।

वे गुरुवार को बंका धर्मशाला में सरावगी परिवार की भागवत कथा के दूसरे दिन प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को परमार्थ सत्य के मार्ग पर चलकर दीन दुखियों की सेवा में जीवन व्यतीत करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने ध्रुव चरित्र, जड़ भरत, राहुगण, अजानिल व्याख्यान नरसिंह चरित्र की कथा सुनाई। इस अवसर पर पूनमचंद सरावगी, राजकुमार, हंसराज, तिलोकचंद गोयल, प्रयागचंद गुप्ता, हजारीमल धीरवासिया, गौरीशंकर, लिछीराम चाचाण, प्रयागचंद सरावगी, कुरड़ाराम, सांवरमल मिश्रा, सुरेंद्र सरावगी, गणेश कुमार, सरला सरिता शर्मा सहित श्रद्धालु मौजूद थे।

रामकथाका समापन, नानी बाई रो मायरो आज से

सुजानगढ़|कस्बेके एनके लोहिया स्टेडियम में गुरुवार को रामकथा का समापन हुआ। यहां शुक्रवार से नानी बाई रो मायरो कथा शुरू होगी। आयोजन शिव संस्थान ठरड़ा धाम श्रीरामकथा आयोजन समिति की आेर से किया जा रहा है।इससे पहले समापन पर कथा का वाचन करते हुए संत मुरलीधर ने सीता का पता लगाने के लिए हनुमान के लंका जाने और वहां सुरसा लंकीनी नामक राक्षसी से मुकाबला होने के प्रसंग का जिक्र किया। विभीषण से हनुमान की मुलाकात की विशद् व्याख्या की। रामकथा में लंका कांड का जिक्र करते हुए संत ने कथा विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या की।समापन पर रामदरबार की सजीव झांकियां प्रस्तुत की गई। समिति के प्रवक्ता भंवरलाल गिलाण ने बताया कि यजमान सत्यनारायण अरोड़ा, डा. गिरधारीलाल चौधरी कोलासर एवं रघुनाथ तंवरा ने पूजा की। कोलायत आश्रम के संत सुखदेव महाराज का स्वागत किया।

तारानगर. बंका धर्मशाला में भागवत कथा में उपस्थित महिला श्रद्धालु।