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40 वर्ष पुरानी व्यवस्था पर ही हो रहा है पानी सप्लाई

7 वर्ष पहले
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कोटा। सुल्तानपुर कस्बे की आबादी बढ़ने के बावजूद 40 वर्ष पुरानी व्यवस्था पर ही जलापूर्ति की जा रही है। इन सालों में कस्बे की आबादी भले ही चार गुना हो गई हो, लेकिन जलापूर्ति की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आया। पुरानी जर्जर पाइप लाइनों के फूट जाने से आए दिन जलापूर्ति प्रभावित होती है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की मानें, तो 3 करोड़ रुपए के प्रस्ताव भी बना कर भेजे जा चुके हैं, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में पड़े हैं।

यहां कस्बे में 10 लाख लीटर पानी के भराव क्षमता की पानी की टंकी आवश्यकता है। इसके मुकाबले वर्तमान में एक लाख लीटर भराव क्षमता की टंकी के जुगाड़ से ही जलापूर्ति की जा रही है। हालांकि जलापूर्ति के लिए ट्यूबवैलों की संख्या में इजाफा हुआ है, लेकिन कस्बे के अधिकांश बस्ती ऊंचाई पर बसी होने से पूर्ण दबाव से सप्लाई के लिए अधिक भराव क्षमता वाली पानी की टंकी की आवश्यकता है।
यहां जर्जर पाइप लाइनों को दुरुस्त करने के लिए उपकरणों की भी कमी है। वहीं अधिकारी भी मुख्यालय पर नहीं ठहरने से व्यवस्था प्रभावित होती है। पूर्व में कस्बे के गांधी चौक मोहल्ले में पाइप लाइनों के रिसाव के चलते करीब आधा दर्जन मकानों में दरारें गई थी। साथ ही एक दो मकानों के ध्वस्त होने की भी घटना हुई थी।

जर्जर हुई मुख्य पाइप लाइन, दो दिनों में एक बार ही जलापूर्ति

सुल्तानपुर में वर्तमान में सरकारी फार्म के पास वाले कुएं से जलापूर्ति की जाती है। कस्बे से फार्म के कुएं तक करीब 30 वर्ष पूर्व पाइप लाइन बिछाई गई थी, जो जर्जर हो चुकी है। जिसके आए दिन टूट जाने से जलापूर्ति बाधित होती है। दो दिन पूर्व भी यह लाइन टूट जाने से कस्बे की जलापूर्ति प्रभावित हुई। विभागीय सूत्रों की मानें तो जलापूर्ति को सुचारु रखने के लिए ट्यूबवैलों का सहारा लिया जाता है, लेकिन पर्याप्त भराव क्षमता वाली पानी की टंकी के निर्माण के बिना समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो सकता।

'कस्बे में पाइप लाइन जर्जर हो चुकी है। नई पाइप लाइनों 10 लाख लीटर की टंकी निर्माण के लिए तीन करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा जा चुका है।'
-राजीवसिंघल, एईएन,पीएचईडी