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मुक्तिधाम में टीनशेड नहीं, कैसे हो बारिश में दाह संस्कार

7 वर्ष पहले
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बारिशहो रही हो और गांव में किसी की मृत्यु हो जाए तो जब तक बारिश नहीं रुक जाती, तब तक शव का अन्तिम संस्कार नहीं हो पाता। इसके साथ ही विद्यालय के सभी कमरों की जीर्ण-शीर्ण स्थिति के कारण बाहर गंदगी में बैठकर बच्चे करते हैं पढ़ाई। कुछ ऐसे ही दृश्य क्षेत्र के खेड़ली काल्या गांव में देखने को मिल रहे हैं। ग्राम पंचायत द्वारा कोई ध्यान नहीं देने के कारण गांव के श्मशान घाट में अतिक्रमियों ने डेरे जमा लिए हैं। तालाब की पाल पर जाने के मार्ग पर जंगली बबूल, घांस-फूस के कारण रास्ता बंद हो गया है।

क्षेत्र के खेड़ली काल्या गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में विद्यालय भवन के जर्जर होने के कारण बरसात के समय कमरों में पानी भर जाता है, जिसके चलते बच्चों को बाहर बैठना पड़ता है। इस सम्बन्ध में विद्यालय प्रशासन ग्रामवासियों द्वारा ग्राम पंचायत को कई बार अवगत करवाया, परन्तु आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। गांववासी रामलाल गुर्जर, चतुर्भुज माली, रामबिलास प्रजापत ने बताया कि जर्जर विद्यालय भवन की समस्या को लेकर 16 अगस्त को नीमोदा गांव में शिविर के दौरान प्रार्थना-पत्र से अवगत करवाया था।

इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर 12 सितंबर को उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर मौका मुआयना करने को कहा तो उन्होंने भी मौका मुआयना करने से मना कर दिया। गांववासी प्रहलाद गुर्जर, छोटूलाल प्रजापत, सत्यनारायण ने बताया कि गांव के श्मशान घाट पर कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमण कर रखा है, जिसके कारण परेशानी उठानी पड़ती है।

हालात यह हैं कि अतिक्रमियों द्वारा श्मशान घाट में स्थित सरकारी नलकूप को भी अपने कब्जे में कर लिया है। श्मशान घाट में टीनशेड नहीं होने के कारण बरसात के समय शव के दाह संस्कार के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इसकी सूचना भी सरपंच से लेकर उपखंड अधिकारी तक को करने के बावजूद किसी के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी तरह गांव में अंग्रेजी बबूलों के कारण तालाब का रास्ता बंद है, जिसके कारण लोगों को तालाब पर जाने के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। गांववासियों द्वारा इस सम्बन्ध में पंचायत शिविर के दौरान अवगत करवाया था, जिस पर तालाब मार्ग की सफाई के लिए मस्टररोल भी जारी की गई थी, परन्तु आज तक कोई समाधान नहीं हुआ है।

सुल्तानपुर. क्षेत्रके खेड़ली कालिया गांव में खुले मैदान में