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गांवों की सरकार को लेकर पंचायती शुरू

7 वर्ष पहले
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पाली. जिस तरह नगर पालिका चुनावों में भाजपा को आसान जीत मिल गई है उसके विपरीत पंचायती राज चुनावों की राह आसान नहीं है। शहरी मतदाता भाजपा के पक्ष में ही रहते हैं, ऐसे में सत्ताधारी दल होने के चलते भी नगर पालिका चुनावों में भाजपा को बहुमत मिल गया। केंद्र राज्य में सरकारों के कामकाज का असर पंचायती राज चुनावों में पड़ता ही है।
जिसके चलते पंचायती राज चुनावों मे इस बार कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है। बहरहाल दोनों ही दल तैयारियों में जुट गए हैं और हरसंभव पंचायती राज में जीत चाहते हैं। 10साल से प्रधान पद पर कांग्रेस का कब्जा : पंचायतसमिति में प्रधान का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचायत समिति का बजट सबसे ज्यादा और बहुत सारे अधिकार होते हैं।

पिछले 10 साल से कांग्रेस का इस पद पर कब्जा है और कांग्रेस इस बार भी कोई मौका छोड़ना नहीं चाहेगी।

क्रॉस वोटिंग होती है ज्यादा

पंचायती राज चुनावों में एक-दूसरे उम्मीदवार आपस में क्रॉस वोटिंग करवाते हैं। ऐसा अक्सर होता है। क्योंकि सरपंच, जिला परिषद सदस्य पंचातय समिति सदस्य के चुनाव अलग-अलग दिन होते हैं। ऐसे में सरपंच बनने की चाह रखने वाला किसी अन्य दल के सदस्य को क्रॉस वोटिंग करवा सकता है।

पंचायती राज चुनावों के लिए भाजपा ने तैयारियां शुरू कर दी है। मंडल स्तर पर बैठकों का दौर चल रहा है और बूथ स्तर के कार्यकर्ता इसमें जुटे हैं। देश में कांग्रेस मुक्त का नारा चल रहा है। निकाय चुनावों की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्र से भी कांग्रेस का सफाया कर दिया जाएगा। परबतसिंहकानपुरा, अध्यक्ष,भाजपा ग्रामीण मंडल सुमेरपुर

ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस का जबरदस्त जनाधार है। कांग्रेस पंचायतीराज चुनावों की तैयारी में पूरी तरह से जुट गई है और वहां जीत के लिए हम तैयार है। हमें पूरा भरोसा है कि पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस की ही जीत होगी। दिलीपसिंहकरणौत, अध्यक्ष,ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सुमेरपुर

कांग्रेस ने जिस तरह से नगर पालिका चुनाव में तैयारी की थी, यदि वैसी तैयारी पंचायतीराज में रही तो जीत कोसों दूर हो सकती है। शहरी चुनाव में तो सत्ताधारी दल का असर पड़ता ही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसका ज्यादा असर नहीं रहता। और तो और शहर के भीतरी भागों के वार्डों में तो भाजपा ने ही कब्जा किया है।
देसूरी/सोजत| गांवों में पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीणों में उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीणों को लॉटरी का इंतजार है, जिससे वह अपने-अपने वार्डों में उम्मीदवार तलाश सके। गांवों में बकायदा इसकी पंचायती भी शुरू हो गई। चुनाव को लेकर भाजपा कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में शहरी निकाय के चुनाव समाप्त होने के साथ गांवों में पंचायत चुनाव को लेकर पंचायती शुरू हो गई। राज्य सरकार ने भी शहरी निकायों के चुनाव के बाद अब गांवों की सरकार चुनने की तैयारी शुरू कर दी है। गांवों की चौपालों में एक ही चर्चा हो रही कि इस बार कौन बनेगा गांव का सरपंच। ऐसे में ग्रामीणों ने भी सरपंच के उम्मीदवार की तलाश शुरू कर दी है।