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पाली 1857 की क्रांति का साक्षी

Dainik Bhaskar

Aug 17, 2014, 05:25 AM IST

Sumerpur News - आउवा गांव बनेगा ऐतिहासिक धरोहर लखावत की अगुवाई में पहुंची एमएनआईटी की 23 सदस्यीय टीम राजस्थान धरोहर संरक्षण...

पाली 1857 की क्रांति का साक्षी
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पाली। राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति के अध्यक्ष औंकारसिंह लखावत की अगुवाई में पहुंची मालवीय नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी की टीम ने शनिवार को 1857 की क्रांति में अहम भूमिका निभाने वाले आउवा गांव की विरासत को सहेजने के बारे में जानकारी ली। लखावत ने इस दौरान ग्रामीणों से चर्चा करते हुए कहा कि आउवा गांव के स्वाभिमान को लौैटाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही इस गांव को हेरिटेज विलेज के रूप में विकसित करने के लिए भी राज्य सरकार प्रयासरत है।
23 अधिकारियों की टीम के साथ लखावत ने गांव का दौरा कर ऐतिहासिकता तथा पौराणिक महत्व के बारे में भी ग्रामीणों से अपने विचार साझा किए।

अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत पहुंचे लखावत ने ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि आउवा किले में सुगाली माता की प्रतिमा को वापस स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। माता सुगाली की मूर्ति को हूबहू बनवाकर पूरे विधि-विधान के साथ प्रतिमा को प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ ही गांव में स्थापित करवाकर आउवा के स्वाभिमान को लौटाया जाएगा। बैठक में आउवा गांव में ग्रामीणों की बैठक लेकर उनसे आउवा के इतिहास से लेकर हेरिटेज महत्व को लेकर सुझाव भी लिए गए।
गांव के उदय भवन में आयोजित इस बैठक में सांसद पीपी चौधरी ने हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। विधायक केसाराम चौधरी ने भी कहा कि आउवा के विकास में कोई कमी नहीं आएगी। इसके लिए वे जनसहयोग के साथ ही सरकारी सहयोग के लिए भी सदैव तत्पर रहेंगे।
सुमेरपुर विधायक भाजपा जिलाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस गांव को और ज्यादा ऐतिहासिक बनाने के साथ ही यहां पर मौजूद इतिहास को समेटकर पुरातत्व गैलेरी का निर्माण करवाने तथा गांव में ही ठाकुर कुशालसिंह की प्रतिमा स्थापित करने की पुरजोर तरीके से वकालात की। इस अवसर पर एमएनआईटी जयपुर के निदेशक प्रो. भट्ट ने भी अपनी टीम के साथ प्रोजेक्ट को सफलता के शिखर तक पहुंचाने की बात कही।

टीम के सदस्यों ने सर्वे कर समेटा इतिहास: लखावत की अगुवाई में पहुंची 23 सदस्यों की एक टीम ने आउवा गांव का सर्वे किया तथा आउवा के इतिहास के बारे में ग्रामीणों तथा पुरातत्व धरोहर के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों से विस्तृत चर्चा की। टीम में पहुंचे प्रो. एम.के श्रीमाली, प्रो. महेंद्रसिंह खड़गावत, प्रो. रामनिवास, प्रो.सतीश पिपराणिया, प्रो. पूजा, प्रो. निरूपी गुप्ता, प्रो. धमेंद्र जैन, कंवल प्रकाश किसनानी, संपत कुमार, प्रेम मौर्य, कमल पंवार, साहित्यकार शक्तिदान कविया, चंद्रप्रकाश देवल, डॉ. राजीव समेत अन्य पुरातत्वविद् भी मौजूद थे। टीम में शामिल अधिकारियों ने मां सुगाली के ऐतिहासिक मंदिर, बावड़ी, तालाब, शिव प्रतिमा, पुराना शिलालेख आदि को देखा और इसके बारे में जानकारी ली। इस अवसर पर आउवा के पूर्व ठाकुर पुष्पेंद्रसिंह, दुर्गा प्रतापसिंह, सरपंच दौलतसिंह सहित ग्राम के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। एडीएम अनवर अली खां ने अपने सुझाव दिये तथा प्रशासन का सहयोग देने की बात कही,करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद यह दल मां सुगाली के ऐतिहासिक मन्दिर पर सर्वे के लिये गया जहां बावडी,तालाब,शिव प्रतिमा, पुराना शिलालेख आदि को देखा और जानकारी ली।

आउवा होगा हेरिटेज लुक में विकसित: ''1857की क्रांति के साक्षी आउवा के स्वाभिमान को लौटाने के प्रयास किए जाएंगे। यहां पर सुगाली माता की हूबहू प्रतिमा लगाने की तैयारी शुरू कर ली है। साथ ही गांव को भी हेरीटेज लुक में विकसित किया जाएगा। - औंकार सिंह लखावत, अध्यक्षराजस्थान धरोहर संराक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण ।

पद्मश्री देवल ने बताया इतिहास : आउवा पहुंचे मालवीय नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अधिकारियों को पद्मश्री पुरस्कार विजेता चंद्रप्रकाश देवल पुरातत्व विशेषज्ञ शक्तिदान कविया ने आउवा गांव के इतिहास के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी।

पुरानी प्रतिमा ही लगाने की वकालत : ग्रामीणों ने लखावत के समक्ष पाली के बांगड़ म्यूजियम में रखी गई 10 मुंह 54 हाथ वाली सुगाली माता की पुरानी प्रतिमा को ही आउवा गांव में स्थापित करने की वकालत की। ग्रामीणों कहना था कि इस प्रतिमा के साथ ग्रामवासियों की भावना जुड़ी हुई है। साथ ही आउवा के प्रवेश द्वारों को ऐतिहासिक रूप से विकसित करने, मुख्य मार्गों चौराहों पर स्वतंत्रता संग्राम के सैनानियों की प्रतिमाएं स्थापित करने, सैनानियों से संबंधित संग्राहलय का निर्माण कराना साथ ही स्मृति उद्यान विकसित करने का भी आग्रह किया।
(मारवाड़ जंक्शन. आउवा में शिलालेख देखते लखावत अन्य। )

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