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पायल सिरोही जिला प्रमुख, भाजपा के 2 बागी बने प्रधान
प्रेमाराम निर्विराेध बने जिला प्रमुख
जिलापरिषद पंचायत समितियों में मिली जोरदार जीत का भाजपा अभी जश्न भी नहीं मना पाई थी कि उसके खेमे में उठे बगावत के सुरों ने सारी खुशियां काफूर कर दी। जिले की पांच पंचायत समितियों में से तीन में स्पष्ट बहुमत के बावजूद भाजपा सिर्फ एक जगह अपना प्रधान बना पाई। जबकि कांग्रेस को जिन दो पंचायत समितियों आबूरोड शिवगंज में बहुमत मिला वहां वह आसानी से अपना बोर्ड बनाने में कामयाब रही।
बगावत के बाद भाजपा को अच्छा खासा नुकसान हुआ है हालांकि पार्टी नेता जिला प्रमुख पद पर मिली जीत से खुश हैं और इस जीत कर हार चुके इस बाजी को यह कहकर टाल रहे हैं कि पार्टी कार्यवाही करेगी। जिलाप्रमुख के चुनाव में भाजपा अपनी पार्टी की पायल परसरामपुरिया को जिलाप्रमुख बनाने में कामयाब रही। रेवदर पंचायत समिति में पहली बार भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला था, फिर भी पार्टी का प्रधान नहीं बन सका। यहां निर्दलीय पूंजाराम मेघवाल प्रधान बने।
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सिरोहीमें भी भाजपा बहुमत में होने के बावजूद क्रॉस वोटिंग से निर्दलीय प्रत्याशी प्रज्ञा कंवर विजयी हो गई। तीन पंचायत समितियों में बहुमत वाली भाजपा सिर्फ पिंडवाड़ा में पार्टी प्रत्याशी टीपू गरासिया को प्रधान बना पाई।
जानिए,जीतकर भी कैसे हारी भाजपा
सिरोहीपंचायत समिति
{कुलसीट 17, भाजपा को मिली 14, कांग्रेस को 2 एक निर्दलीय के खाते में गई। ऐसे में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत था। जिसके तहत उसका प्रधान बनना भी तय था।
{ भाजपा की प्रत्याशी प्रेम कंवर ने दो नामांकन भाजपा से भरे। प्रज्ञा कंवर ने भी दो नामांकन भरे, जिसमें एक भाजपा और दूसरा निर्दलीय के रूप में था।
{ निर्दलीय दीपा राजगुरु ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना पर्चा जमा कराया। मामला त्रिकोणिय हो गया।
{भाजपा ने प्रेम कंवर को पार्टी का सिंबल दिया। इस पर जांच में प्रज्ञा कंवर का भाजपा से भरा नामांकन खारिज हो गया, निर्दलीय दीपा राजगुरु ने अपना नामांकन ले लिया, लेकिन प्रज्ञा कंवर ने भाजपा से बगावत की और नाम वापस नहीं लिया।
{चुनाव के बाद घोषित परिणाम में निर्दलीय प्रज्ञा कंवर को 9 वोट मिले, जबकि भाजपा की प्रेम कंवर को 8 वोट मिले। इस पर प्रज्ञा कंवर एक वोट से विजयी घोषित की गई।
{कांग्रेस के दो और एक निर्दलीय ने प्रज्ञा कंवर को वोट दिया और एक उनका खुद का वोट मिला तो ऐसे में भाजपा से पांच जनों ने बगावत की। यदि निर्दलीय ने भाजपा का साथ दिया तो भी भाजपा से चार जनों ने बगावत की।
रेवदर पंचायत समिति
{रेवदर पंचायत समिति की कुल 21 सीटों में से 15 सीटें भाजपा, 3 कांग्रेस और 3 निर्दलीय के खाते में गई थी। समिति गठन के बाद पहली बार यहां भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला।
{सवेरे भाजपा के रणजीत कोली ने नामांकन दाखिल किया। कुछ देर बाद पहुंचे पूंजाराम ने दो नामांकन भरे, जिसमें एक भाजपा और दूसरा निर्दलीय से था।
{पार्टी की ओर से रणजीत कोली को सिंबल मिला। इस पर पूंजाराम का पार्टी से भरा नामांकन खारिज हो गया, लेकिन पूंजाराम ने नाम वापसी के दौरान अपना पर्चा वापस नहीं लिया और निर्दलीय चुनाव लड़ा।
{परिणाम में भाजपा प्रत्याशी रणजीत कोली को 8 वोट मिले, जबकि निर्दलीय पूंजाराम को 13 वोट मिले। पूंजाराम 5 वोटों से विजयी घोषित किए गए।
{अब यदि माना जाए कि कांग्रेस के 3, निर्दलीय 3 एक खुद का वोट पूंजाराम को मिला तो भाजपा से 6 जनों ने बगावत की, लेकिन यदि माना जाए कि निर्दलीयों ने भाजपा का साथ दिया तो भाजपा से 9 जनों ने बगावत की।
जिलाप्रमुख चुनाव में दो नामांकन : सवेरेभाजपा से पायल परसरामपुरिया और लक्ष्मी पुरोहित ने नामांकन दाखिल किया, जबकि कांग्रेस नीलकमल चौधरी ने नामांकन भरा। दोपहर करीब एक बजे पायल परसरामपुरिया को पार्टी का सिंबल मिलने से लक्ष्मी पुरोहित का नामांकन खारिज हो गया। अपरान्ह 3 बजे से वोटिंग शुरू हुई। सबसे पहले भाजपा के 11 प्रत्याशी वोटिंग के लिए पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस के 6 प्रत्याशी भी पहुंचे। कुछ देर बाद एक और भाजपा प्रत्याशी पहुंचा। तत्पश्चात तीन प्रत्याशियों में से पायल परसरामपुरिया भी पहुंची, लेकिन लक्ष्मी पुरोहित और गिरिजा कंवर नहीं पहुंची। काफी देर बाद यह दोनों प्रत्याशी भी पहुंची। वोटिंग के बाद घोषित परिणामों में पायल परसरामपुरिया के खाते में भाजपा के सभी 15 वोट और नीलकमल के खाते में कांग्रेस के सभी 6 वोट गए। पायल 9 वोटों से विजयी घोषित की गई।
शहर में निकाला जुलूस : सिरोही. पायल परसरामपुरिया के जिलाप्रमुख बनने पर शहर में विजय जुलूस निकाला गया। इस मौके भाजपा के पूर्व प्रवक्ता लोकेश खंडेलवाल, महामंत्री सूरजपालसिंह, दिनेश बिंदल, उपाध्यक्ष शांतिलाल पुरोहित, विजय गोटवाल, लक्ष्मण रावल, पनेसिंह, हीदाराम माली, सुरेश सगरवंशी आदि मौजूद थे।
उप जिला प्रमुख उपप्रधान के चुनाव आज
पहले दावेदार फिर आगे बढ़कर खीमाराम बने प्रस्तावक
प्रेमारामको प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद एकबारगी भाजपा में अंदर ही अंदर सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। इसको भांपते ही जिलाध्यक्ष मदन राठौड़ ने प्रेमाराम चौधरी के लिए जिला प्रमुख पद का नामांकन पत्र मंगवाया। पार्टी की भावनाओं का सम्मान करते हुए खीमाराम आगे आए और प्रस्तावक बने। इसके बाद मल्लाराम दूसरे प्रस्तावक बने। दोनों दावेदारों के प्रस्तावक बनने के बाद वरिष्ठ नेताओं ने राहत की सांस ली।
शैक्षणिकयाेग्यता के दस्तावेजों को लेकर फिर उठा विवाद
प्रेमारामके जिला प्रमुख बनते ही विरोधियों ने उनके खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया। उनके सदस्य पद के लिए नामांकन भरने के साथ ही उन पर आरोप लगाए गए थे कि उनकी दसवीं की अंकतालिका फर्जी है। उन्होंने यूपी बोर्ड से दसवीं उत्तीर्ण के दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। विरोधियों ने इसकी शिकायत जिला कलेक्टर रोहित कुमार गुप्ता को भी की थी। शिकायत के साक्ष्य में यूपी बोर्ड की दूसरी अंकतालिकाएं भी प्रस्तुत की गई थीं जिनमें एक ही वर्ष में बोर्ड सचिव के अलग-अलग नाम हस्ताक्षर थे। शनिवार को उनके जिला प्रमुख बनने के बाद एक बार फिर इस मार्कशीट को लेकर दिनभर राजनीतिक हल्कों में चर्चाओं का माहौल गरमाया रहा।
पंचायतीराज मंत्री सुरेंद्र गोयल कर रहे थे मल्लाराम की पैरवी, ज्यादातर विधायक चाह रहे थे खीमाराम को जिला प्रमुख बनाना, शनिवार सुबह जयपुर से आया आलाकमान का सांसद की पसंद प्रेमाराम को जिला प्रमुख प्रत्याशी बनाने का फरमान
जिला प्रमुख बनी पायल परसरामपुरिया परिणाम सुनकर भावुक हो गई। उनकी आंखों से आंसू छलक गए। फोटो : राजू
पाली. निर्विरोध निर्वाचन के ऐलान के साथ ही कंधों पर उठाकर नए जिला प्रमुख प्रेमाराम चौधरी का अभिनंदन करते समर्थक।