पेज 11 का शेष
डाॅ.डीके शारदा, अर्जुन योगी और डॉ.केशाराम पटेल के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय डॉक्टरों की टीम सुबह 9 बजे ही मोर्चरी के बाहर पहुंच गई थी, लेकिन इस घटना से गुस्साए लोगों ने उन्हें मोर्चरी में प्रवेश ही नहीं करने दिया। प्रशासन और पुलिस के विरोध में जमकर नारेबाजी होते देखकर इन डॉक्टरों को वापस लौट जाना पड़ा। पुलिस के निर्देश पर करीब 10.30 बजे फिर से ये लोग पोस्टमार्टम के लिए आए तब भी हालत में कोई बदलाव नहीं दिखा और फिर से इन्हें वापस लौटना पड़ा। दोपहर बाद विधायक, कलेक्टर, एसपी अन्य जनप्रतिनिधियों की समझाइश के बाद लोग माने और पोस्टमार्टम किया गया। करीब एक बजे पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा।
हरआंख रही नम, हर जुबां पर कातिलों को पकड़ने की मांग : सुबह7 बजे से ही बांगड़ अस्पताल के मोर्चरी के बाहर लोगों की जमकर भीड़ जमा होने लगी,देखते ही देखते हजारों लोग वहां पहुंच गए थे। इस दौरान पुलिस के खिलाफ लोगों में जबरदस्त गुस्सा नजर आया। जब तक पोस्टमार्टम शुरू नहीं हुआ अपराधियों को पकड़ने की मांग को लेकर पुलिस के खिलाफ रुक-रुक कर नारेबाजी होती रही। जैसे ही पोस्टमार्टम शुरू हुआ हर आंख में नमी नजर आई और हर जुबां पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी आक्रोश साफ तौर पर झलक रहा था। जितनी देर तक पोस्टमार्टम चला, बार-बार स्थिति बिगड़ने की आशंका बनती रही। एक दो मौकों पर तो भीड़ उखड़ भी गई, लेकिन वहां मौजूद जनप्रतिनिधियों और दूसरे लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला। विधायक ज्ञानचंद पारख, सुमेरपुर विधायक मदन राठौड़, नगर परिषद चेयरमैन महेंद्र बोहरा,भाजपा पार्षद राकेश भाटी, गिरधारीसिंह मंडली, जेठमल डागा, विनय बंब सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी गुस्साए लोगों से समझाइश की कोशिश की उन्हें आरोपियों की शीघ्र पहचान कर कानून के कटघरे में लाने का आश्वासन दिया, तक कहीं कहीं लोगों का गुस्सा कुछ शांत हुआ।
शवयात्रामें उमड़े शहरवासी : दोपहरकरीब 1.30 बजे मृतक दीपक सोनी का शव बांगड़ अस्पताल से उनके निवास स्थान ले जाया गया। दोपहर करीब 3 बजे चेन्नई से उनके छोटे भाई सज्जनराज सोनी के आने के बाद गमगीन माहौल में शवयात्रा निकाली गई। दीपक का शव घर पहुंचते ही परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। ऐसे में उसके घर के बाहर मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। दीपक का शव देखते ही पिता घेवरचंद सोनी, माता साेना देवी, बड