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अब गांव भी होंगे विकसित, जिम, लाइट खेल मैदान के साथ पब्लिक पार्क बनेंगे

5 वर्ष पहले
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भास्करसंवाददाता | पाली/सुमेरपुर

राजस्थानके गावों का चेहरा अब बदलने जा रहा है। पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग ने एक नई योजना का खाका तैयार किया है, जिसके तहत हर गांव में फूल पौधों वाला एक शानदार उद्यान विकसित किया जाएगा। इन उद्यानों का एक हिस्सा जिम भी होगा, जहां गांवों के लोग हर दिन योग और व्यायाम कर सकेंगे। हर गांव में साफ सुथरी गलियां होगी और स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। हर गांव में एक अच्छा खेल मैदान विकसित करवाने की भी योजना है।

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योग गुरु बाबा रामदेव के एक सुझाव पर गांवों का हुलिया बदलने की यह कवायद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और विभाग के मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने तैयार की है। इसे आगामी बजट में शामिल किया जा रहा है। पंचायतीराज और ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि एक ऐसी योजना पर काम हो रहा है, जिसके तहत प्रदेश के प्रत्येक गांव को शहर की तरह विकसित किया जाएगा। इसके तहत पब्लिक पार्क बनाने, जिम लगवाने और स्ट्रीट लाइटों की सुविधा मुहैया करवाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत प्रदेश के 44,795 राजस्व गावों में से शुरुआती तौर पर हर पंचायत समिति की क्षमता के अनुसार सुविधाएं दी जाएंगी।

पाली में ग्राम पंचायतों में खेल मैदान बनाने की तैयारी, प्रशिक्षण भी मिलेगा

जिलेके सभी ग्राम पंचायतों में खेल मैदान तैयार को लेकर प्रस्ताव भी तैयार करा दिए गए है। हर ग्राम पंचायत में मैदान विकसित करने की सरकार की और से घोषणा की थी। प्रदेश की खेल प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का नाम रोशन कर सकें इसके लिए ग्राम पंचायतों में खेल मैदान का विकास किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार खेल मैदान योजना शुरू करेगी। इस योजना से हर ग्राम पंचायत में अच्छे खेल मैदानों का निर्माण होगा और वहां के प्रतिभावान खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और अभ्यास की सुविधाएं मिल सकेंगी। यानी अब प्रदेश में खेल मैदानों के साथ ही पार्क और जिम की सुविधा भी ग्रामीण आबादी को मिलेगी।

जिले में 321 ग्राम पंचायतों के 1050 राजस्व गांवों को मिलेगा फायदा

पालीजिले में 321 ग्राम पंचायतों के तहत 1050 से अधिक राजस्व ग्राम हैं। 2011 जनगणना के अनुसार राजस्थान की कुल 6.86 में से करीब 5.15 करोड़ की आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। यानी करीब 75 प्रतिशत आबादी गांवों में बसती है। 2015-16 में बजट में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग को करीब 5500 करोड़ रु. आवंटित किए गए। इनमें से 56.30 फीसदी बजट सीधे ग्राम पंचायतों में हस्तांतरित हुए। जबकि जिला परिषद 26.13 फीसदी और पंचायत समिति के माध्यम से 17.10 फीसदी बजट का पैसा खर्च किया गया।

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