श्रवण की पहले ही राउंड से बढ़त
\\\"सरकार\\\' को हराने से बढ़ेगा श्रवण का कद
मतगणना की राउंडवार स्थिति
आपकी बदौलत जीते हम
शेष प्रत्याशियों को मिले वोट
उपचुनाव में श्रवण कुमार ने भाजपा को तो हराया है। यह मिथक भी तोड़ा है कि \\\"उपचुनाव सरकार जीतती है।\\\' वैसे भी पूर्व मुख्यमंत्री ने 10 सितंबर को सभा में कहा था श्रवणकुमार को हराने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी लगी हुई है। इस तरह से श्रवण सिर्फ पांचवीं बार विधायक बने बल्कि पूरी सरकार से लोहा लिया है। जिले के दिग्गज नेता शीशराम ओला के निधन के बाद राहुल गांधी के प्राइमरीज फार्मूले में कांग्रेस के इंटरनल चुनाव हारने के कारण लोकसभा प्रत्याशी नहीं बन सके थे। ओला की पुत्रवधू डॉ. राजबाला प्राइमरीज जीतकर चुनाव लड़ी थी लेकिन जमीनी नेता की तरह श्रवण कुमार ने सक्रियता बनाए रखी। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव, सहकारिता मंत्री अजय किलक, लोकसभा में सचेतक अर्जुन मेघवाल समेत करीब 38 विधायक एवं नौ सांसद उनके खिलाफ लगातार गांवों में घूमे। अन्य पदाधिकारी भी डॉ. दिगंबर के नामांकन के पहले से क्षेत्र में चुके थे। डॉ. दिगंबर के वसुंधरा के नजदीकी होने और ओला परिवार की मुखालफत के चलते अधिकांश स्थानीय कांग्रेस पदाधिकारियों से सहयोग नहीं मिलने के बावजूद श्रवण ने चुनाव जीतकर मूर्छा में चुकी कांग्रेस को सांस दी है।
मीडियाकर्मी से कैमरे छीने
हारके बाद डॉ. दिगंबर के समर्थकों ने मीडियाकर्मी से बदसलूकी की। जब वे राणी सती मंदिर परिसर में बने हॉल में थे, प्रतिक्रिया फोटो लेने मीडियाकर्मी वहां गए। इस दौरान पत्रकार मांगूसिंह शेखावत से हाथापाई की गई। उनका कैमरा छीन लिया फोटो डिलीट कर दिए। इसकी शहर के मीडियाकर्मियों ने भर्त्सना की।
मतगणना केंद्र में नहीं पहुंचे वरिष्ठ भाजपा नेता
भाजपानेता हार की आशंका में थे या जीत के मुगालते में? स्वयं प्रत्याशी डॉ. दिगंबरसिंह सहित ज्यादातर वरिष्ठ नेता मतगणना केंद्र में नहीं गए। मतगणना स्थल से कुछ दूर राणी सती मंदिर परिसर में बने हॉल में लगाए गए टीवी पर इन्होंने टीवी पर ही रुझान देखे। नतीजा आने पर वहीं से ये लोग रवाना हो गए।
और गिरता चला गया भाजपा के वोटों का ग्राफ
सूरजगढ़क्षेत्र में नौ महीने के दौरान भाजपा वोटों का आंकड़ा गिरता चला गया। दिसंबर में विधानसभा चुनाव में संतोष अहलावत ने 1 लाख 8840 वोट लेकर श्रवण कुमा