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शहर में तीन गोशालाएं, फिर भी हजारों पशु बेसहारा
कस्बेमें घूमते बेसहारा पशु आमजन के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। शहर में तीन गोशालाएं संचालित हैं। इनमें दो स्थायी एक अस्थायी गोशाला है। इसके बावजूद कस्बे में बेसहारा पशुओं की संख्या दिनों दिन बढ़ रही हैं। पशुओं की बढ़ रही संख्या उनके निवाले का संकट भी पैदा कर रही हैं। गोशाला संचालकों की माने से गोशालाओं में पांच हजार के करीब छोटे-बड़े निराश्रित पशुओं का पालन-पोषण हो रहा है। जानकारी के अनुसार कस्बे में पांच से छह हजार बेसहारा पशु बिना सहारे के इधर-उधर विचरण करते हैं। इनमें अधिकांश पशु मुख्य बाजार, सब्जी मंडी गलियों में घूमते रहते हैं। यही वजह है कि शाम के वक्त सब्जी मंडी में पशुओं का जमघट लगने से खरीदारी करने वाले कई लोग पशुओं से नुकसान उठा चुके हैं। गलियों में गोधों के दिनभर विचरण करने से बच्चों का खेलना तक मुश्किल हो रहा है। सूरतगढ़-श्रीगंगानगर बीकानेर हाईवे पर पशु रात के समय अचानक सड़क पर जाने से कई वाहन चालक मौत का शिकार हो चुके हैं या चोट लगने से घायल हो चुके हैं, साथ ही पशु भी वाहनों की चपेट में आने से मौत का ग्रास बन रहे हैं।
नहींमिल रही अलग से जगह: गोरक्षा दल, सामाजिक, व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से पशुओं के लिए अलग से सरकारी जमीन आवंटित करने की मांग कर रहे हैं। यही नहीं विधायक से भी जमीन दिलाने का आग्रह किया। लेकिन आवेदन प्रशासन की फाइलों में दब कर रहे गए। यही वजह है कि बेसहारा पशु प्रशासन की अनदेखी का शिकार हो भटकने को मजबूर हैं।
प्रशासनसे की है बजट दिलवाने की मांग
^नगरपालिकासभागार में दस दिसंबर को हुई संभाग स्तरीय बैठक में मैने संभागीय आयुक्त से बेसहारा पशुओं को रखने के लिए जगह उनकी सार-संभाल के लिए बजट दिलवाने की मांग है। संभागीय आयुक्त ने समस्या को गंभीर माना है और जल्द ही बजट जगह उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया है। काजलछाबड़ा, चेयरमैननगरपालिका सूरतगढ़।
सूरतगढ़. कस्बे में सड़क के किनारे बैठे बेसहारा पशु।