पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • स्वायल हेल्थ कार्ड के जरिए खेत का बनेगा रिकाॅर्ड

स्वायल हेल्थ कार्ड के जरिए खेत का बनेगा रिकाॅर्ड

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ऐसे बनेगी भूमि की केस हिस्ट्री

हालांकिप्रस्तावित योजना की अधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई लेकिन विभाग पीएम मोदी के दौरे को देखते हुए इसे मिशन बनाने की दिशा में व्यस्त दिखाई दिया। जानकारी के अनुसार यह कार्ड खेती योग्य भूमि का अधिकारिक दस्तावेज होगा। इसके अंतर्गत किसान मिट्टी जांच के बाद भूमि के पोषक तत्व का स्तर जान पाएगा। भूमि में अम्लीयता/क्षारीयता अथवा लवणीयता की मात्रा कितनी है। इसके अलावा विद्युत चालकता आदि का कार्ड में रिकॉर्ड होगा।

कार्डबनाने के लिए किसान क्या करेंगे

किसानोंको अपने खेत की 15 सेमी गहरी परत की अलग अलग स्थानों से मिट्टी लेकर सूती कपड़े की थैली में डालनी होगी। पूरे खेत में जितने प्रकार की भूमि होगी, उतने ही सैंपल लेने होंगे। यह मिट्टी आधे से एक किलो रहेगी। थैली पर खेत मालिक का नाम पता, भूमि का चक, मुरबा, बीघा नंबर लिखना होगा। पिछले सीजन की फसल और उसमें डाले गए खाद, उर्वरक एवं गोबर की खाद कब डाली गई आदि जानकारी देनी होगी। इसके बाद यह कृषि विभाग की संचालित मिट्टी परीक्षण रसायनशाला में जमा करानी होगी। कृषि अनुसंधान केंद्र में विभाग की स्थापित मिट्टी परीक्षण रसायन शाला में प्रति वर्ष 10 हजार स्वायल हैल्थ कार्ड बनाए जा सकते हैं। इसके बाद रसायन शाला भूमि में विद्यमान आर्गेनिक कार्बन, फास्फोरस, पोटाश, सूक्ष्म पोषक तत्व, स्वाइल पीएच (मिट्टी की अभिक्रिया), केल्शियम कार्बोनेट आदि को यह कार्ड दर्शाएगा।

एग्रीकल्चर रिपोर्टर, श्रीगंगानगर।

कृषिविभागस्वायल हेल्थ कार्ड (स्वस्थ खेत मिट्टी कार्ड) योजना को अब एक अभियान के रूप में शामिल करेगा। संभवत: इस अभियान का प्रदेश में विधिवत उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी 19 फरवरी को सूरतगढ़ में अपने प्रस्तावित दौरे में करें। विभाग इसे अमली जामा पहनाने की तैयारी में लगा हुआ है।

जानकारी के अनुसार अब प्रत्येक किसान के लिए उसकी खेती योग्य भूमि यहां तक कि अगर पूरे खेत के बीघे भिन्न स्थिति वाले हैं तो उनका स्वस्थ खेत मिट्टी कार्ड अनिवार्य हो जाएगा। इसमें भूमि की मिट्टी का सारा रिकॉर्ड होगा। एक तरह से यह खेती वाली भूमि की केस हिस्ट्री होगी। कार्ड हर किसान के लिए अनिवार्य हो जाएगा। राज्य सरकार इसे निशुल्क करना चाहती है।

यहहोंगे लाभ

खेतके इस अधिकारिक दस्तावेज से किसानों को जानकारी मिलेगी कि भूमि में काैनसी फसल मुफीद रहेगी। उसमें कौनसे तत्व कम ज्यादा हैं, इसकी जानकारी के आधार पर फसल में खाद एवं उर्वरक डाले जा सकेंगे। इससे किसान के हर खेत में उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ेगी।