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नर्सिंग कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है सरकारी अस्पताल

7 वर्ष पहले
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गांवके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से डॉक्टर का पद खाली होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बीरमाना सहित आस-पास के करीब 35 से 40 गांवों के मरीज इसी अस्पताल में इलाज करवाने आते हैं। सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों को इलाज करवाने के लिए मजबूरन सूरतगढ़, राजियासर या श्रीविजयनगर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वर्तमान में यह अस्पताल नर्सिंग कर्मियों के भरोसे ही चल रहा है। जानकारी के अनुसार अस्पताल में करीब एक साल से एलोपैथी डॉक्टर का पद खाली पड़ा है। एक आयुर्वेद चिकित्सक के भरोसे अस्पताल चल रहा था लेकिन एक महीने पहले आयुर्वेद चिकित्सक का तबादला कर दिया गया, जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को बिना इलाज करवाए ही वापस लौटना पड़ रहा है।

दूरीबन रही है समस्या

बीरमानासे सूरतगढ़ की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। ऐसे में बीरमाना के अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने से यह दूरी समस्या बन रही है। जानकारी के अनुसार गांव के पास सड़क हादसे में घायल को यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया जाता है, लेकिन डॉक्टर के अभाव के कारण उसे सूरतगढ़ रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई बार गंभीर रूप से घायल व्यक्ति दम तोड़ देते हैं।

आयुषडॉक्टर लगाने का किया जा रहा है प्रयास

जिलेमें ही डॉक्टरों की कमी चल रही है। इसके बावजूद बीरमाना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयुष डॉक्टर की नियुक्ति करने का प्रयास किया जा रहा है।

डॉ.मनोज अग्रवाल, ब्लॉकसीएमओ सूरतगढ़।

बीरमाना. गांव में बना राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र