गांवों में आज भी पीने का साफ पानी बड़ी समस्या
अस्पतालों की हालत दयनीय, आंगनबाड़ी केंद्र खुलते हैं मनमर्जी से
भास्कर संवाददाता, श्रीगंगानगर।
गांवोंमेंआज भी पीने का साफ पानी एक बड़ी चुनौती है। हालत यह है कि ज्यादातर गांवों में जलदाय विभाग के फिल्टर ही खराब हैं तो कई जगह पाइपें नाकारा हो चुकी हैं। यही वजह है कि गांवों में लोगों को अपने घरों में फिल्टर लगाने पड़ रहे हैं, ताकि साफ पानी पी सकें। श्रीगंगानगर के गांवों की यह तस्वीर 21 प्रशिक्षु आरएएस के गांवों के अध्ययन में सामने आई है। प्रशिक्षु आरएएस ने यह रिपोर्ट अब अपने जयपुर ट्रेनिंग सेंटर ओटीएस को सौंपी हैं, जो सरकार को भेजी जाएगी।
राज्य सरकार ने 21 प्रशिक्षु आरएएस को पांच दिन के दौरे पर पिछले सप्ताह श्रीगंगानगर भेजा था। इनमें 7 प्रशिक्षु आरएएस को हिंदुमलकोट, 7 को प्रभातनगर यानी सूरतगढ़ थर्मल तथा 7 प्रशिक्षु आरएएस को बुड्ढाजोहड़ भेजा गया था। इन प्रशिक्षु ने 1 से 5 फरवरी तक इन क्षेत्रों में रहकर गांवों की मुख्य समस्याओं तथा सरकार की योजनाओं के तहत चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया था। इन 5 दिन में ये प्रशिक्षु अधिकारी बहुत से लोगों से भी मिले। प्रशिक्षु अधिकारियों ने भास्कर को बताया कि 5 दिन में जिस भी गांव ढाणी में जाकर महिलाओं पुरुषों से मिले, सबकी समस्या पेयजल ही थी। कई ढाणी तो ऐसी थी, जहां पानी ही नहीं पहुंचता। वहां महिलाओं को गांवों में जाकर पानी लाना पड़ता है। वाटरवर्क्स की डिग्गियां देखी तो उनमें बहुत ज्यादा गंदगी थी। दूसरी समस्या गरीब लोगों के साथ है।
रायसिंहनगर के गांवों में समस्याएं कम, श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ में ज्यादा
प्रशिक्षुआरएएस ने पाया कि रायसिंहनगर के गांवों में समस्याएं अपेक्षाकृत कम हैं। वहां के लोग एसडीएम अन्य अधिकारियों के कामकाज से संतुष्ट भी हैं, लेकिन श्रीगंगानगर सूरतगढ़ में समस्याएं ज्यादा हैं। यहां के लोग अफसरों के व्यवहार से भी खुश नहीं हैं।
इन प्रशिक्षु आरएएस ने अस्पताल, सब सेंटर्स, आंगनबाड़ी केंद्र तथा स्कूलों को भी चेक किया था। अस्पतालों की मुख्य समस्या यह थी कि वहां दवाएं तो थी, लेकिन दवाएं देने के लिए स्टाफ डाॅक्टर्स ही नहीं है। छोटी-छोटी बीमारी के लिए वहां नीम-हकीम या जिला मुख्यालय के बड़े अस्पताल जाना पड़ता है। ये अधिकारी सुबह 11:30 बजे एक आंगनबाड़ी केंद्र पर पहुंचे। लेकिन वो बंद मिला। एक और आंगनबाड़ी केंद्र पर गए। वहां 20 बच्चे नामांकित थे, लेकिन मौके पर 6 ही मिले। बच्चों की कम उपस्थिति पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। स्कूलों में टीचर्स तो थे, लेकिन खेल सुविधाएं नहीं हैं। कहीं ग्राउंड हैं तो शारीरिक शिक्षक नहीं है। कहीं शिक्षक है तो ग्राउंड नहीं है।