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7 वर्ष पहले
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आदेशमें कहा गया है कि अवैध बजरी खनन को रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों से एनजीटी संतुष्ट नहीं है। जिला प्रशासन अवैध खनन गतिविधियों को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है।

अवैधखनन रोकने के बार-बार निर्देश, फिर भी गंभीर नहीं सरकार : राज्यसरकार को जयपुर, अलवर तथा इसके आस-पास के क्षेत्रों में हो रहे बजरी के अवैध खनन पर ग्रीन ट्रिब्यूनल रोक लगाने के निर्देश पहले भी देता रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता नित्येंद्र मानव ने 2013 में हाईकोर्ट के समक्ष अवैध खनन पर रोक के लिए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले को एनजीटी को सौंप दिया था। मानव ने बताया कि एनजीटी में 24 सितंबर 2013 से मामले की सुनवाई शुरू हो गई थी। इसके बाद समय-समय पर सरकार को अवैध बजरी खनन रोकने के निर्देश दिए, लेकिन अधिकारियों, बिल्डर्स और बजरी माफियाओं के गठजोड़ के चलते हर बार दिखावटी प्रयासों के सिवा कुछ नहीं हुआ।

याचिकाकर्ताको भी नहीं मिली पर्याप्त सुरक्षा : इसमामले में खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराए। वहीं याचिकाकर्ता नित्येंद्र मानव ने बताया कि अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। लेकिन सरकार की ओर से उन्हें सिर्फ एक पुलिस कर्मी उपलब्ध करवाया गया है जो 24 घंटे सुरक्षा उपलब्ध नहीं करवा सकता।

सीएममिलती...

जयपुरमें सरकार की नाक के नीचे डकैती हुई। महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया गया। यह साबित करता है कि प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं रही। अलवर सहित प्रदेश में आए दिन हो रही घटनाएं मानवता पर कलंक हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार मुआवजे की गलत मांग नहीं कर रहा। गुंडा, बदमाश के लिए कोई मुआवजा नहीं मांगता। पीड़ित परिवार को राहत देना सीएम के हाथ में हैं। गहलोत ने कहा कि उन्होंने 45 साल राजनीति में बिताए। लेकिन ऐसे हालात कभी नहीं देखे। घटना के 11 दिन बाद मृतक छात्र के परिजनों के खिलाफ ही झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं बढेग़ी। महापंचायत को पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, राज्य सभा सांसद अश्कअली टांक, पूर्व मंत्री रामकिशोर सैनी, पूर्व चिकित्सा मंत्री दुर्रू मियां, पूर्व सांसद डॉ.करण सिंह यादव, विधायक शकुंतला रावत, एआईसीसी सचिव ज