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साक्षर के नाम पर सिखाया केवल हस्ताक्षर करना

5 वर्ष पहले
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चार साल तक संभाला भी नहीं, खर्च कर दिए 24 लाख रुपए

दावा: ये ग्राम पंचायत साक्षर घोषित

साक्षरताविभाग के मुताबिक जिले में कई पंचायतों को साक्षर घोषित किया जा चुका हैं। जिनमें बूंटिया, सहजूसर, बुचावास, ढाणी कुम्हारान, खरतवासिया, पुनरास, भोजासर छोटा, दुलरासर, फोगा भरतरी, पूलासर, रामसीसर, गोगासर, कुसुमदेसर, परसनेऊ, सांगासर, सीतसर, ढाणी बड़ी, ख्याली, नेसल छोटी, पहाड़सर, सांखणताल, भगेला, भानीसरिया तेज, चाड़वास, दूंकर, ढढ़ेरू भामूवान, भाषीणा ढाणी कालेरा शामिल है।

तेहनदेसर ग्राम पंचायत के लोक शिक्षा केंद्र पर लटका ताला।

पूर्णमल

चूरू

5760

तारानगर

2120

राजगढ़

6920

सुजानगढ़

2730

सरदारशहर

6500

रतनगढ़

1470

मार्च 2016 का लक्ष्य

2010 के सर्वे का रिपोर्ट कार्ड

22जुलाई को प्रदेश में हुआ सर्वे

{1.24 करोड़ परिवारों का सर्वे

{ 15 से अधिक आयु के निरक्षक-एक करोड़ 25 लाख 20777

{ 32 जिलों के 224 ब्लॉकों की 9021 ग्राम पंचायतों पर सर्वे

{ चूरू जिले में कुल असाक्षर: दो लाख 66 हजार 389

{ जिले में पुरुष असाक्षर: एक लाख 22 हजार 401

{ जिले में महिला असाक्षर: एक लाख 43 हजार 988

साहवा के पूर्णमल रमेश कुमार ने बताया कि परीक्षा देने के बाद कभी केंद्र पर नहीं बुलाया। दुकान होने के कारण छोटा-मोटा हिसाब-किताब पहले से ही आता था। जोड़-तोड़ के अखबार बड़ी मुश्किल से कुछ पढ़ पाता हूं। यह भी घर पर ही सीखा। इसके अलावा ज्यादा कुछ नहीं आता।

सिर्फ हस्ताक्षर आता है | गांवसहजासर की परमेश्वरी देवी ने बताया कि उसे सर्टिफिकेट मिल चुका है। लेकिन हस्ताक्षर के अलावा कुछ नहीं आता। यह तो पहले भी आता था। वहीं सरोज देवी ने बताया कि खुद का नाम भी सही तरह से लिखना नहीं आता।

प्रदेश स्तर पर एक परीक्षार्थी पर 230 रुपए खर्चा

सर्वे

6रुपए

शिक्षकसामग्री

60रुपए

पठन-पाठनसामग्री

30रुपए

प्रशिक्षकोंपर

109रुपए

मूल्यांकन

25रुपए

जिलास्तर पर

10से 15 रु.

चूरू जिले में परीक्षाओं के लक्ष्य और उपलब्धि

परीक्षाटारगेट परीक्षा दी खर्चा

18 मार्च 2012 22500 18689 182787

26 अगस्त 2012 44000 32523 362911

17 मार्च 2013 28000 25908 248141

25 अगस्त 2013 25000 23766 250113

9 मार्च 2014 35000 29607 192884

24 अगस्त 2014 27000 24772 441504

15 मार्च 2015 29500 27049 322050

23 अगस्त 2015 33000 25486 394806

{विभाग : अबतक हुई परीक्षाओं में साक्षर किए लोगों को लोक शिक्षा केंद्रों पर पढ़ाया जाता है। इनके लिए वाचनालय भी बनाया हुआ है। सुबह 11 से 1:30 और शाम तीन से 5:30 बजे तक उन्हें पढ़ाया जाता है।

दैनिकभास्कर ने ग्राम पंचायतों में रिपोर्टस भेजे। कहीं-कहीं लोक शिक्षा केंद्रों का अता-पता नहीं है। कोई आइटी केंद्र में चल रहे है, लेकिन दोनों समय वहां कोई नहीं मिला। अधिकतर केंद्रों पर ताले मिले।

{असाक्षरों कोसाक्षर करने के लिए दिलवाई जाने वाली परीक्षा नामांकित परीक्षार्थी ही देते है। बाद में उन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑपन नोएडा कंपनी से सर्टिफिकेट दिया जाता है।

पिछलीआठ परीक्षाओं में कई बार ऐसे मामले सामने आए, जिनमें परीक्षार्थी की जगह बच्चे या अन्य कोई परीक्षा देता पाया। कुछ ग्राम पंचायतों से सूचना मिली की अभी तक सर्टिफिकेट नहीं मिले। विभाग के जिला कार्यालय ग्राम पंचायतों पर आज भी ये पड़े है।

चूरू जिले में ये है स्थिति | साक्षरताभारत कार्यक्रम के तहत जिले में 249 ग्राम पंचायतों पर लोक शिक्षा केंद्र संचालित हो रहे है। हर केंद्र पर दो प्रेरक लगे है। इन्हें दो हजार रुपए मासिक 500 रुपए वाचनालय के लिए दिए जाते है। इसके अलावा साक्षरता कक्षाएं संचालित करने के लिए 1496 स्वयंसेवी शिक्षक लगा रखे हैं। जिले में तीन हजार साक्षरता कक्षाओं के संचालन के टारगेट पर 1963 जगह संचालित हो रही हैं।

अब तक क्या : 2012से 2015 तक आठ परीक्षाएं हुई। इन पर 23 लाख 75 हजार 196 रुपए खर्च कर दिए। इनमें दो लाख 7800 को साक्षर किया। सभी को सर्टिफिकेट दिए।

हकीकत: साक्षरताविभाग के अधिकतर लोक शिक्षा केंद्रों पर ताले रहते हैं। टारगेट पूरे करने के लिए परीक्षाएं दिला दी जाती है। बाद में इन साक्षरों की आगे प्रोग्रेस नहीं की जाती।

क्याकरना चाहिए : विशेषज्ञोंका मानना है कि साक्षर करने के बाद अगले साल ही इन साक्षरों को स्वरोजगार, ट्रेनिंग, सतत शिक्षा से जोड़ना चाहिए।

पड़िहारा. कस्बे के आईटी सेंटर में संचालित सतत शिक्षा केंद्र में दोपहर तीन से चार बजे तक कोई नहीं मिला।

अखिलेश दाधीच | चूरू

दावाकिया जा रहा है कि पिछले चार साल में चूरू जिले में दो लाख सात हजार 800 अंगूठा छाप व्यक्तियों को साक्षर किया जा चुका है। इनको साक्षर करने के लिए करीब 24 लाख रुपए भी खर्च किए गए। यह खर्चे का आंकड़ा तो केवल परीक्षा का ही है। इन सरकारी आंकड़ों के पीछे दूसरा सच ये है कि निरक्षरों को साक्षर करने के बाद पहली-दूसरी कक्षा लेवल तक के सर्टिफिकेट जरूर बांटे, लेकिन परीक्षाओं के बाद इन्हें एक बार भी संभाला नहीं गया। हैरानी की बात है कि जब भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया है कि साक्षर कहलाने वाले केवल हस्ताक्षर तक सीमित रह गए।

जिला साक्षरता एवं सतत् शिक्षा केंद्र की ओर से इन चार सालों में आठ बार बेसिक साक्षरता मूल्यांकन परीक्षा ली गई। आठ परीक्षाओं में दो लाख 44 हजार का टारगेट दिया गया था। इस साल फिर दो परीक्षाएं होनी है। पहली परीक्षा 20 मार्च को होगी और दूसरी अगस्त महीने में होनी प्रस्तावित है। पहली परीक्षा में जिले में 25 हजार निरक्षकों काे साक्षर करने का टारगेट दिया गया है। विभाग तैयारियों में जुट गया है। लक्ष्य पूरा करने के लिए अधिकारी कर्मचारी योजना बनाने लगे हैं, लेकिन परीक्षा के बाद फिर वही हालत होगी।

^निरक्षकोंको साक्षर करने के टारगेट के अनुसार निरक्षकों को साक्षर करने के लिए परीक्षा दिलवाई जा रही है। साल में दो बार परीक्षा ली जाती है। परीक्षा के बाद साक्षर व्यक्ति को संभालने को लेकर निदेशालय से कोई गाइड लाइन अभी नहीं मिली है। रामकरणरुयल, जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी, चूरू

राकेश कुमार

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