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चमत्कार का प्रतीक बावड़ी की माता जलदेवी का मंदिर
चमत्कार का प्रतीक बावड़ी की माता जलदेवी का मंदिर
टोडारायसिंह. उपखंडके ग्राम बावड़ी में मातेश्वरी भगवती, जलदेवी दुर्गा का मंदिर है। यह स्थान टोडारायसिंह से 9 किमी दूर टोडा-झिराना रोड पर है। यहां प्रत्येक नवरात्र में मेला भरता है। इतिहासविज्ञ के प्रमाण के अनुसार करीब 125 वर्ष पूर्व यहां अकाल पड़ा था और दैवीय प्रकोप से बीमारी फैल गई। इसमें काफी संख्या में लोग मारे गए। उस समय इसी गांव के उमा सागर जलाशय पर एक महात्मा समाधिस्थ होकर देवी भक्ति में लग गए। उनकी अटूट श्रद्धा भक्ति से प्रसन्न होकर सिंहवाहिनी भगवती दुर्गा ने साक्षात स्वरूप का अर्द्ध-रात्रि में उसे दर्शन दिया। देवी ने प्रकट होकर बताया कि उसकी प्रतिमा इस ग्राम के दक्षिण की तरफ कुएं में वर्षों से जलमग्न है, जो कि इस जलाशय के पास है। इस गांव की दुर्दशा प्रतिमा की दुर्दशा के कारण हो रही है। अब जन कल्याण के लिए मेरी प्रतिमा को कुएं में से निकाल कर स्थापित करो। देवी भगवती के दिव्य दर्शनों से प्रेरित होकर उस महात्मा ने तत्कालीन जागीरदार के सहयोग से भगवती प्रतिमा को कुएं से निकाला तथा विधानपूर्वक विशाल यज्ञ करवाकर चबूतरे पर स्थापित किया। पूर्वमुखी देवी प्रतिमा के असीम वैभव एवं प्रतिभा से प्रभावित होकर शीघ्र ही लोगों एवं ठिकानों के जागीरदार आदि ने मिलकर एक मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर का फर्श संगमरमर का है। इस पर पुराने समय के चांदी के सिक्के जड़े हुए हैं। यहां एक अक्षय दीपक भी स्थापित किया गया, जो देवी कृपा से अब तक निर्विघ्न एवं अनवरत जलता रहता है। यहां देवी अनुकंपा से लंगड़े, बहरे, अपंग, अंगहीन, नेत्रहीन, अपाहिज, असहाय, संतानहीन, लक्ष्मी हीन, दुखी-जन मनौतियां मांगने आते हैं। ब्रह्मभोज, जागरण, भजन कीर्तन, यज्ञ स्वाध्याय पाठ आदि धार्मिक कार्य आए दिन होते हैं। यहां प्रति वर्ष चैत्र शुक्ला पूर्णमासी को विराट मेला स्थानीय ग्राम पंचायत के तत्वावधान में भरता है। मां जलदेवी मंदिर पर भजनों के एलबम भी शूट किए गए हैं।