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एक्सपोर्ट को बनाई विशिष्ट मंडी, पर घटती गई मिर्च की खेती

7 वर्ष पहले
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बंपरपैदावार और तल्खी के लिए अलग पहचान रखने वाला सोहेला का मिर्च कारोबार सुविधाओं की कमी से सिमट कर रह गया है। यहां के मिर्च कारोबार को ऊंचाई देने के लिए करीब 10 साल पहले कृषि मंत्री रहते हुए प्रभुलाल सैनी ने करीब 4.50 करोड़ की लागत से सोहेला में विशिष्ट मिर्च मंडी का निर्माण कराया था। अफसोस है कि उत्पादन और उसी क्षेत्र में विपणन के लिए बनाई विशिष्‍ट मंडी में अब तक कारोबार भी शुरू नहीं हो सका। वजह जिले में मिर्च की खेती एक दशक पहले तक 2 हजार हेक्टेयर से अधिक एरिया में होती थी, जो सिमटकर 200 हेक्टेयर ही रह गई है। 2004-05 के बाद मिर्च की खेती में निरंतर गिरावट आती गई। वर्तमान भी 200 हेक्टेयर में ही मिर्च की बोआई हुई है। मंडी सचिव इश्तियाक अहमद के मुताबिक उत्पादन के समीप ही विपणन के तहत सोहेला में मिर्च मंडी का निर्माण कराया गया था। मिर्च का उत्पादन बीसलपुर बांध बनने के बाद धीरे-धीरे कम होता गया। आवक कम होने के कारण इसे सामान्य मंडी घोषित कर दिया गया। व्यापारियों को भूखंड आवंटित कर दिए गए।

लाल नजर आते थे मैदान, अब वीरान

लालमिर्च बाजार में आते ही उसको सुखाने के लिए यहां के ज्यादातर परिवारों को दो-तीन महीने का रोजगार मिल जाता था। महिलाओं की भी बड़ी भूमिका होती थी। मिर्च कारोबार से बड़ी संख्या में व्यापारी जुड़े थे और यहां खरीदारी के लिए आया करते थे। उस समय सुखाने के लिए रखे मिर्च से मैदान लाल नजर आते थे। ये नजारे अब नहीं दिखाई देते। मैदान वीरान पड़े रहते हैं।

मंडी में ही लगे फैक्ट्री

किसानोंऔर कारोबारियों के मुताबिक पहले की बजाय मिर्च में रोगों की संभावनाएं अधिक होने से किसानों ने बोआई कम कर दी। कीटनाशक महंगा होने से भी किसानों की रुचि कम हो गई। मिर्च की फसल को रोगों से बचाने के लिए जो कीटनाशक उपयोग में लेते हैं, उनकी दर कम हो और मिर्च का तेल निकालने की फैक्ट्री मंडी में ही लगाई जाए, जिससे मिर्च की फसल को प्रोत्साहन मिले। गौरतलब है कि मिर्च के तेल की विदेशों में खासी मांग है।

किसानोंको करेंगे प्रोत्साहित

कृषिउद्यान के सहायक निदेशक रमेशचंद जैन का कहना है कि मिर्च के लिए किसानों को आधी कीमत में कीटनाशक दिया जाता है। मिर्च कारोबार को फिर से जिंदा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस बार 200 हेक्टेयर में बोआई की गई है। अगली बार से रकबा बढ़ाने के लिए कृषकों क