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टोंक की रूबातों से देशभर के हाजियों को मिल रही है सहूलियत
सऊदीअरब में टोंक की बेगमों द्वारा बनवाई गई रूबातों (धर्मशालाएं) से देशभर के हाजियों को आर्थिक सहूलियतें करीब एक शताब्दी से मिल रही हैं। वहीं बेगमों के इस कार्य की वजह से टोंक सहित देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग ही पहचान कायम किए हुए है। मक्का शरीफ में बनाई गई रूबातों को वहां की सरकार द्वारा क्षेत्र के विस्तार के लिए अधिग्रहण किए जाने के बाद हज पर जाने वालों को करीब 5 साल से सहुलियत नहीं मिल रही थी।
सऊदी अरब के मक्का शरीफ में अधिग्रहीत की गई रूबातों के मिले मुआवजे से नई रूबातें खरीदे जाने पर इस बार करीब 400 हजयात्रियों को मक्का में ठहरने की निशुल्क सहूलियत मिलेगी। इसके लिए टोंक की रूबात अथॉरिटी से इजाजतनामे (अनुमति पत्र) भी जारी किए जा चुके हैं। इनमें देशभर के कई यात्री शामिल हैं। रूबात अथॉरिटी सा. इस्मत अली खां ने बताया कि इस बार मक्का में भी नई रूबातें खरीदे जाने की वजह से हाजियों को आर्थिक राहत मिलेगी। मक्का की दो रूबातों के लिए 396 इजाजतनामे जारी किए हैं। वहीं मदीना की पांच रूबातों में ठहरने के लिए करीब 1300 हजयात्रियों को इजाजतनामे जारी किए गए। इजाजतनामे पहले टोंक शहर के लोगों को फिर परगना टोंक जो रियासत काल में टोंक का क्षेत्र था, उसके बाद टोंक जिला एवं बाद में यदि सीटें शेष बचती हैं तो वह ऑल इंडिया के हजयात्रियों को दिए जाते हैं। मक्का में मलका फिरदौस जमानी बेगम रूबात में 400 हजयात्री खलीलुजमानी बेगम की रूबातों में 200 यात्री ठहर सकते हैं। खलीलुजमानी बेगम की रूबात के लिए टोंक शहर के हाजियों को ही इजाजत मिल रही है। बाकी जगह खाली रहती है। यहां भी सभी सीटें मिलें, इसके लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
कितनाआता है खर्च
हजगाइडेंस सोसायटी के अध्यक्ष मोइनुद्दीन जावेद भाई ने बताया कि जिनको रूबात का इजाजतनामा नहीं मिलता है उनका ग्रीन केटेगरी में 1 लाख 92 हजार रुपए एवं अजीजिया के लिए करीब 1 लाख 62 हजार रुपए खर्च होता है। जिन्हें इजाजतनामे मिल जाते हैं उनका खर्च करीब 1 लाख 12 हजार जमा होता है। इस बार टोंक जिले से 82 यात्री हज के लिए गए हैं।
टोंक . मदीनामें बनी टोंक की रूबात को भी क्षेत्र के विस्तार के कारण आगामी वर्ष में हटाया जा सकता है।
टोंक. मक्कामें बनी टोंक की रूबात। इस धर्मशाला को क्षेत्र का विस्तार होने के कारण हटा दिया गया था।