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प्रथम प्वाइंट पर ही हो कार्रवाई तो रुके ओवरलोडिंग
भारीजुर्माने के बावजूद भी ओवर लोड परिवहन की समस्या जिले में कम नहीं हो पा रही है। जहां इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण को कारण माना जाता रहा है, वहीं सरकार मंशा में लचीलापन भी कारण बना हुआ है।
इसी वजह से जिले में एक साल में 5474 वाहनों के चालान कर 4263. 36 लाख रुपए वसूले जाने के बाद भी ओवरलोड की समस्या बनी हुई है। ओवरलोड वाहनों पर पिछले एक साल में परिवहन विभाग ने 5474 वाहनों के चालान बनाकर 4263.36 लाख का जुर्माना वसूल किया। 26 परमिट वाहनों के परमिट निलंबित किए। 92 के परमिट निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित है। 13 वाहनों के पंजीयन, 25 चालकों के लाइसेंस निलंबित किए। 20 पर कार्रवाई जारी है। जिसके कारण जिले में ओवरलोड वाहनों की आवाजाही हर मार्ग पर बखूबी देखी जा सकती है। लोगों का कहना है कि ओवरलोड वाहनों की समस्या से कभी कभी हालत बेहद दयनीय हो जाते हैं। बजरी के किसी ओवरलोड वाहन के पीछे वाहन पर चलने पर आंखों में धूल उड़कर आती है। इससे दुर्घटना तक का खतरा बना रहता है।
ओवरलोड वाहनों की समस्या से खासकर बनास नदी से हाईवे तक आने वाले रास्तों की सड़कें हमेशा टूटी रहती है। इससे लोगों को आने जाने में भी परेशानी उठानी पड़ती है। इसपर ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। इसपर संबंधित विभाग ध्यान नहीं देता है। अभियान के तहत कार्रवाई से पार नहीं पड़ेगी इसके लिए प्रथम प्वाइंट पर कार्रवाई की शुरूआत की जाए। जहां से ओवरलोड वाहन भरकर आया वहां उस फर्म, व्यक्ति एवं संस्था पर भी कार्रवाई की आवश्यकता जताई जा रही है।
िनरंतर कार्रवाई जारी
जिलापरिवहन अधिकारी भवानी सिंह शेखावत का कहना है कि ओवरलोड वाहनों पर नियमानुसार निरंतर कार्रवाई की जा रही है। जहां से बजरी या अन्य ओवर लोड भरे जाने का कार्य होता है, उस प्रथम प्वाइंट पर कार्रवाई की जरूरत महसूस होती रही है। इस संबंध में आने वाली समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाता रहा है। 26 परमिट वाहनों के परमिट निलंबित किए। 92 के परमिट निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित है। 13 वाहनों के पंजीयन, 25 चालकों के लाइसेंस निलंबित किए।
टोंक. ओवरलोडवाहनों पर जुर्माने के बाद भी निकलते आेवरलोड ट्रक।