आधी शताब्दी से मुख्तार टोंकी की लेखनी साहित्य को है समर्पित
टोंककी सरजमीं पर कई ऐसी नामवर शख्सियतें पैदा हुई, जिन्होंने टोंक का नाम देशभर में रोशन किया। ऐसी ही एक शख्सियत सैयद मुख्तार अली मुख्तार टोंकी के नाम से जानी जाती है। जो पिछले करीब 50 साल से साहित्य के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अब तक करीब 15 किताबें लिखने के साथ ही करीब एक हजार मजामिन आदि भी लिख चुके हैं। अब भी उनकी लेखनी का कार्य जारी है। वो शायर, अफसानानिगार होने के साथ ही कई विधाओं में लिखते रहे हैं। उनकी शायरी में जहां तंज मजा है, वहीं उसमें गहराई एवं जिंदगी की हकीकत का बयां भी नजर आता है।
रईसोंऔर रजिलों से कभी यारी नहीं करता,
मैं नीलाम हरगिज अपनी खुद्दारी नहीं करता।
मेरा जाहिर भी बातिन है, मेरा बातिन भी जाहिर है,
खुले दिल से मैं मिलता हूं अदा करारी नहीं करता।
सैयदमुख्तार अली टोंकी की पैदाइश 1939 में टोंक में हुई। उनको कम उम्र में ही लिखने पढ़ने का शौक हो गया था। वाे अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, राजस्थानी एवं अरबी फारसी के जानकार होने के साथ ही अच्छे शिक्षक भी रहे हैं। उनकी रचनाएं देहली, दुबई, हिंदुस्तान एवं इंग्लिस्तान आदि की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है। उनकी रचनाओं में व्यंग्य, हास्यरस की भी झलक खूब मिलती है।
वोकानी हो, के खुदरी हो, वो मोटी हो के भौंडी हो,
पिता जी ने कहा था सो ये रिश्ता कर लिया मैंने।
हया को ताक में रखकर वो नंगे ही चले आए,
मुझे तो शर्म आई उनसे पर्दा कर लिया मैंने।
केबल पर टोंक का नाम रोशन कर रहे मुख्तार टोंकी को बिहार, उत्तर प्रदेश की उर्दू अकादमियों ने पुरस्कृत किया। वहीं गालिब सोसायटी उर्दू जयपुर की जानिब से उनको मोह सीने उर्दू के खिताब से भी नवाजा गया। टोंक में भी कई संस्थाओं ने उनको सम्मान दिया, वहीं कई अन्य जगह भी वह सम्मानित होते रहे हैं।
अभीआगे बढऩा मुनासिब नहीं है,
अभी रास्तों में अंधेरे बहुत है।
अभी हर कदम पर खतरे है यारों,
अभी हर कदम पर लुटेरे बहुत हैं।
देशके नामवर शायर अख्तर शिरानी सहित कई अदीबों पर भी मुख्तार टोंकी ने लिखा, वहीं उन्होंने प्रेरित करने वाले अफसाने एवं अन्य विधियों में भी अपनी कलम चलाई। अब तक वह 15 किताबें लिख चुके हैं तथा अब भी लिखने का कार्य जारी है। दिल्ली सहित कई जगहों पर सेमिनारों में भी पत्रवाचन कर चुके हैं। यहां तक उन्होंने जापानी शैली हाइको को भी अपनाया।
रखता ऐसीशान,
सारे देशों से बेहतर,
मेरा हिंदुस्तान।
कमबोलना एवं ज्यादा सोचना जहां उनकी आदत में शुमार है, वहीं उनके मिजाज में खुद्दारी एवं अपने कार्य के प्रति वफादारी भी बहुत नजर आती है। वो कई सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं से भी जुड़े रहे। रेडियों पर भी उनकी रचनाएं प्रसारित होती रही है।
बड़ाअजीब सा मंजर दिखाई देता है,
हर एक गुल मुझे अजगर दिखाई देता है।
शउर पीने का जिसको नहीं है साकी,
उसी के हाथ में सागर दिखाई देता है।
सैयदमुख्तार टोंकी ने गीत, गजल सहित कई देश भक्ति से ओतप्रोत रचनाएं की लिखी है, वहीं उन्होंने जिंदगी की कई हकीकतों को मजाहिया अंदाज में उजागर भी किया। साहित्य के क्षेत्र में 50 साल से किए जा रहे उनके कार्यों पर उनकी चारो तरफ प्रशंसा की जाती रही है।
कहांतक साथ देगी ये चमन की डालिया देखे,
कब तक करेगी आशियां बरबाद बिजलियां देखे।
डूबो कर खूने दिल में ये फसाना मैंने लिखा है,
अगर अहले नजर चाहे तो मेरी उंगलियां देखे।