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438 निजी स्कूल भौतिक सत्यापन में सही मिले
शिक्षाका अधिकार अधिनियम के तहत जिले में वेबपोर्टल पर प्रारंभिक सेकंडरी स्तर के रजिस्टर्ड 783 निजी स्कूलों के भौतिक सत्यापन के बाद 438 स्कूल ही विभागीय जांच के बाद अधिनियम के अनुसार सही पाए गए हैं, जिससे 345 स्कूलों को निशुल्क प्रवेशित बच्चों के बदले विभाग की ओर से मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि से वंचित रहना पड़ सकता है।
विभाग द्वारा स्कूलों के भौतिक सत्यापन की कार्यवाही के बाद जांच में 345 स्कूल एेसे बचे हैं। जिनमें 8 स्कूलों ने वेब पोर्टल पर लॉक नहीं किया तथा 119 स्कूलों ने डाटा दर्ज ही नहीं किए हैं। वहीं 156 स्कूल विभाग की अोर से की गई जांच में सही नहीं पाए गए हैं, जबकि 73 स्कूलों का मिलान किया जाना बाकी है। जिससे विभाग की ओर से दी जाने वाली प्रतिभूति राशि 438 स्कूलों को मिल सकेगी।
अन्य स्कूलों द्वारा कमियां पूर्ति कर डाटा एंट्री नहीं की गई तो उन्हें शिक्षा के अधिकार के तहत निशुल्क प्रवेशित बालकों की प्रतिपूर्ति राशि विभाग की और से नहीं दी जा सकेगी। भौतिक सत्यापन के बाद सही पाए गए स्कूलों में प्रारंभिक शिक्षा के 330 सेकंडरी के 108 स्कूल शामिल हैं।
^जिन स्कूलों ने भौतिक सत्यापन के बाद वेबपोर्टल पर त्रुटियां सही कर दावा प्रपत्र नहीं दिया है। एेसे स्कूलों को क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा। जिसके लिए स्कूल ही जिम्मेदार होंगे।
-किशन मीणा, प्रभारी आरटीई, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय , टोंक
ऐसा करना होता है स्कूलों को
निजीस्कूलों में एंट्री लेबल कक्षाओं में 25 प्रतिशत बालकों को निशुल्क प्रवेश देने तथा इसकी एंट्री वेबपोर्टल पर करने के उपरांत विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन करवाया जाकर स्कूल में निशुल्क प्रवेशित बालकों के बदले विभाग की प्रतिपूर्ति राशि विभाग की ओर से स्कूलों को दी जाती है। इससे पूर्व विभागीय नियमों के अनुसार स्कूलों को वेबपोर्टल पर भौतिक सत्यापन सहित अन्य डाटा एंट्री करने के बाद दावा प्रपत्र शिक्षा विभाग को प्रस्तुत करने के बाद विभाग की ओर से प्रतिभूति राशि का भुगतान स्कूलों को किया जाता है। ऐसे में जिन स्कूलों की ओर से कार्यवाही नहीं की जाती है उन्हें विभाग प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं करेगा।