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िनरंकारी सत्संग भवन में प्रवचन

6 वर्ष पहले
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टोंक|पांच बत्तीस्थित संत निरंकारी सत्संग भवन पर साप्ताहिक विशाल सत्संग का आयोजन नवल किशोर निरंकारी के सान्निध्य में किया गया। महात्मा ने विचारों में कहा कि नवल किशोर निरंकारी इंसानियत की परख आचरण से होती है। आचरण से गिरा इंसान पशुओं से भी बदतर माना जाता है। इंसान के अपने आचरण से गिरने के पीछे एक मात्र कारण निकृष्ट स्वार्थ भाव ही है, जिससे जीवन में संकीर्णताएं उत्पन्न होती हंै। संकीर्णतावश आदमी आचरण से गिरता चला जाता है। इंसान में अगर इंसानियत नहीं तो वह इंसान कहलाने योग्य नहीं है। इंसानियत अगर जीवन में है तो पर-उपकार वाला भाव जीवन में विशालता लाता हैै। प्रवक्ता सीताराम ने बताया कि सत्संग में धौलपुर से आए महात्मा हरीश, स्थानीय महात्मा शंभू, अशोक बहन गायत्री, भूमिका आदि ने भी विचार व्यक्त किए।