पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • आखिर पार्क क्यों नहीं हरे भरे

आखिर पार्क क्यों नहीं हरे भरे

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
एकनिजी स्कूल के गार्डन की स्थित देख ये सवाल खड़ा होना लाजमी ही था कि आखिर निजी स्कूल ने इतना अच्छा गार्डन उसी धरती पर विकसित किया गया, जिस शहर में करोड़ रुपए स्वीकृत होने के बावजूद नगर परिषद एक भी ढंग का गार्डन विकसित नहीं कर पाई। अधिकारियों का कहना है कि पार्कोँ की स्थिित सुधारे जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नेहरू पार्क में बीआरजीएफ के तहत 32 लाख रुपए खर्च किए गए, लेकिन वह निर्माण कार्य के साथ ही उजड़ गया।

उल्लेखनीय है कि बीआरजीएफ के तहत प्रति वर्ष करीब 2 करोड़ रुपए स्वीकृत हो रहे हैं। जिसका उपयोग पार्क आदि पर भी किया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। जबकि टोंक रियासत काल में 50 से अधिक बाग थे। वर्तमान में हालत ये है कि यहां पर एक भी पार्क ऐसा नहीं है। लोगों का कहना है कि सरकार एवं जनप्रतिनिधियों का रुझान इस ओर नहीं होने के कारण पार्कों की स्थिित ठीक नहीं है।

टोंकका बागों से नाता पुराना

इतिहासके अनुसार संवत 1498 विक्रमी में सातलदेव के जमाने में सुखराम सरावगी जो अजमेर का रहने वाला था, उसने उत्तर की तरफ यानी पुरानी टोंक क्षेत्र में एक बगीचा बनवाया था। उसके पास एक बावड़ी निर्मित कराई थी। इसी प्रकार रियासत काल में किलाए मुअल्ला के सामने नजर बाग के नाम से एक बाग 1824 में लगाया गया।

जिसकी पहचान दूर दूर तक थी, लेकिन आज वहां पर बाग तो नजर नहीं आता है कचरे के ढेर एवं गंदगी जरुर दिखाई पड़ जाती है। गुलजारे इब्राहिम बाद में इसे गुलजार बाग के नाम से जाना जाने लगा। इस बाग को नवाब वजीरुद्दोला के जमाने में खत्म कर दिया गया था। नवाब इब्राहिम अली खां ने इसको फिर से आबाद किया। नवाब सआदत अली खां ने वहां पर कोठी बनवाई। मोतीबाग इस बाग का निर्माण नवाब अमीर खां की बेगम ने आबाद किया। आज वहां पर कब्रिस्तान है। ईदगाह बाग गहलोत घाट के पास स्थित था। बनास बाग ये रियासत काल का सबसे पुराना बाग कहा जाता है जिसे बैगम बाग के नाम से भी जाना गया। बाग बंद जो कच्चा बंधा के समीप था, पहाडिय़ों के दामन में था, जहां पर नवाब सेर सपाटा करने जाया करते थे। बहीर रोड पर फिरोज बाग था, जिसमें खलील क्लब भी स्थित है। बाग खाला साहिबा का बाग बनास नदी के किनारे था, जिसे वजीरुद्दोला की खाला साहिबा ने अपने पति की याद में बनवाया बताया जाता है।

बेगम बाग नवाब अमीर खां की मृत्यु के बाद बनास नदी के समीप लगाया गया। मेहंदी बाग पुरानी टोंक से अलीगंज की सडक़ के दायी तरफ ये बाग था, आज वहां पर आबादी है। बाग चुन्नीलाल ये बाग बहीर के रास्ते में खलील क्लब के सामने था।

बाग इस्हाक खां ये बाग जयपुर रोड पर स्थित था। नैन सुख की बगियां टोंक जेल के पास ये बाग स्थित था, अब वहां पर खेती का कार्य होता है। इसी प्रकार रियासत काल में करीब 50 बाग और भी थे।

अमरूदके लिए थे मशहूर

चंदलाईका बाग, ककराज बाग दोनों बागों के अमरूद खासे प्रसिद्ध थे। दूर दूर तक इन बागों को अमरूदों के लिए पहचाना जाता था। आज भी इन बागों के अमरूदों की चर्चा सुनाई देती है।

गुम हो गया था हाथी

अंधेरीबाग के बारे में इतिहास में लिखा है कि अंधेरी बाग बहुत घना था। जिसके लिए मशहुर था कि एक समय वहां पर एक हाथी गुम हो गया था। लेकिन आज वहां पर दयनीय स्थिति ही नजर आती है।

टोंक. येहै एक निजी स्कूल का पार्क, जो नगर परिषद क्षेत्र में ही है।

टोंक. यहनगर परिषद के अधीन नेहरू पार्क जो लंबे समय से हरियाली को तरस रहा है।

स्वतंत्रता सैनानी रफी अहमद किदवई की याद में किदवई पार्क का निर्माण 1955-56 में हुआ, लेकिन बनने के बाद से ही ये पार्क देखभाल के अभाव में पूरी तरह उजड़ चुका है। हालांकि उसमें कुछ विकास कार्य हुए लेकिन वह भी उजड़ चुके हैं। कई अन्य पार्कों पर भी ध्यान नहीं दिए जाने के कारण उनका उपयोग नहीं हो रहा है तथा कहीं लोग शौच करते नजर आते हैं तो कहीं असामाजिक तत्वों की शरण स्थली के रुप में पार्क दिखाई देते हैं।

बहीर क्षेत्र स्थित फूलबाग जहां आजादी के बाद तक कहा जाता है कि सवा मन फूल प्रतिदिन तोड़े जाते थे। लेकिन देख भाल नहीं होने के कारण यहां पर अब फूल नजर नहीं आते हैं। इस समय यहां वन विभाग की नर्सरी है।