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कांग्रेस की हार ने भाजपा की जिम्मेदारी भी बढ़ाई

6 वर्ष पहले
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जिलेमें भाजपा के लहराए परचम ने कांग्रेस को सोचने को मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसा क्या हो गया, जिसके कारण निरंतर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसको लेकर कांग्रेस के नेता कोई संतोषप्रद जवाब तो नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ने सत्ता हांसिल करने के बाद कार्यकर्ताओं को महत्व अधिक नहीं दिया। साथ ही जो कांग्रेस को नुकसान पहुंचाते रहे उनके इर्द गिर्द ही कांग्रेस संगठन घूमता रहा। रही सही कसर गड़बडाए जातीय समीकरण ने पूरी कर दी।

हाल ये हुआ के विधानसभा, लोकसभा, निकाय के बाद पंचायत राज चुनाव में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। दयनीय स्थिति तो उस समय नजर आई जब कांग्रेस निर्दलीय उम्मीदवार की जीत पर ही जश्न मनाते नजर आए। बहरहाल कांग्रेस की हार एवं भाजपा के जिले में लहराए भाजपा के परचम ने भी भाजपा के समक्ष चुनौति प्रस्तुत कर दी है। भाजपा के पास विकास के लिए कोई बहाना नहीं बचा है। केंद्र से लेकर पंचायत तक भाजपा ही भाजपा हो गई है। ऐेसे में भाजपा को विकास के लिए क्रमबद्ध समय तय करना पड़ेगा।

लोगों की उम्मीद है कि पहले तो टोंक रेल से जुड़े, उद्योग धंधे बढ़े तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे। एक व्यक्ति किसी विभाग में काम लेकर जाए तो उसको प्रताड़ना सहन नहीं करनी पड़े। प्रभावशाली लोगों के ही नहीं आमजन में भी कानून व्यवस्था के प्रति िवश्वास पैदा हो। लेकिन अब तक अधिकांश लोगों का मानना है कि भाजपा ने विकास एवं विश्वास जिस हिसाब से बहुमत मिला है नहीं दिखाया है। कांग्रेस की निरंतर हर स्तर पर हुई हार ने भाजपा की विकास की जिम्मेदारी बढा दी है। लेकिन भाजपा में पनप रही गुटबाजी ने भी कहीं ना कहीं विकास की एकजुटता को कमजोर किया लगता है। यहीं कारण है कि आज कांग्रेस के नेता कहते हैं कि जो वादे किए वह पूरे नहीं हो पा रहे हैं। जो कार्य हमने शुरू किए उसको भी सही ढंग से पूरा नहीं किया जा रहा है। गरीब को आवास के लिए आगे की किस्त सहित कई को पेंशन आदि नहीं मिल पा रही है।