बजट के अभाव में डाइट की हालत खराब
राज्यसरकार भले ही शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण एवं बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर रही हो, लेकिन शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण एवं बेहतर बनाने के लिए स्थापित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) की स्थिति कुछ अच्छी नहीं है। जहां रिक्त पदों ने हालत खराब कर रखी हैं, वहीं आधुनिकता के इस युग में डाइट को हाइटेक नहीं किया जा सका है। हालांकि राज्य सरकार ने अपने बजट घोषणा में डाइट को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए 10 लाख रुपए के प्रावधान किए थे। लेकिन करीब एक साल बाद भी बजट नहीं मिलने के कारण स्थितियां पहले की तरह बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक संसाधनों के लिए 10 लाख रुपए के प्रस्ताव बनाकर भेजे जा चुके हैं। उनको स्वीकृति मिलने के बाद डाइट में स्मार्ट क्लास रुम में आधुनिक तरीके से प्रशिक्षण आदि दिया जा सकेगा। इसमें नेटवर्किंग, लर्निंग एवं लाइब्रेरी की सुविधाएं मुहैया हो सकेगी। जिले में करीब 29 साल से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) संचालित हो रही है। लेकिन स्थापना की मंशा के मुताबिक इस पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण इसकी स्थिति दिनों-दिन दयनीय होती जा रही है।
पदरिक्त चल रहे हैं
डाइटमें संचालित होने वाली बीएसटीसी की 50 सीटों को बढा़कर 100 किए जाने के प्रस्ताव सहित उसको आधुनिक संसाधन के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं। लेकिन उसके विपरीत यहां पर हाल ये हैं कि वरिष्ठ व्याख्याता के 4 पदों में से दो रिक्त है। व्याख्याता 18 में से पांच पद रिक्त, मंत्रालयिक कर्मचारी में लेखाकार, सांख्यिकी निरीक्षक, आशु लिपिक का एक-एक पद रिक्त है। यूडीसी के दो पद रिक्त चल रहे हैं।
डाइटका अब तक का सफर
शिक्षामें गुणवत्तापूर्ण विकास के लिए सरकार ने नई शिक्षा नीति 1986 की स्थापना कर सभी राज्यों में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की। इसके तहत टोंक में भी डाइट के स्थापना हुई। जिसका संचालन पूर्व में बग्गी खाने में हुआ। बाद में 1994 में इसको जेल रोड के आगे नए भवन में शिफ्ट किया गया।
जो क्षेत्र आज उसके क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। लेकिन डाइट अपनी स्थापना की मंशा अनुरूप अपनी पहचान स्थापित नहीं कर पाई। जिस प्रकार वहां का रास्ता शहरी आबादी से दूर है। कुछ ऐसी ही स्थिति वहां पर रिक्त पदों के कारण शिक्षण-प्रशिक्षण की भी दिखाई पड़ रही है।
येहै डाइट के मुख्य कार्य
डाइटमें सर्वे अनुसंधान, क्रियात्मक अनुसंधान, सेवारत प्रशिक्षण, सेवा पूर्ण प्रशिक्षण, पुस्तक लेखन, शैक्षिक गोष्ठी, पाठयक्रमों का मूल्यांकन, डर्फ बैठकों के आयोजन, प्रश्न पत्र निर्माण आठवीं बोर्ड परीक्षा आदि मुख्य कार्य है। इसके अलावा भी कई प्रशिक्षण आदि कार्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए किए जाते हैं।
टोंक. रिक्तपदों एवं कई अाधुनिक संसाधनों के अभाव में नहीं हो पा रही है स्मार्ट डाइट।