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अजमेर-कोटा बना तबादले और रिमार्क का रूट

9 वर्ष पहले
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अजमेर.रोडवेज का अजमेर-कोटा-भोपाल-उज्जैन मार्ग कंडक्टरों के रिमार्क और तबादलों का रूट बन चुका है। जोन में सबसे अधिक कंडक्टरों के तबादले इसी रूट पर होते हैं। जोन में इस रूट से हर महीने 30 से 35 कंडक्टरों को सजा के तौर पर रुखसत होना पड़ता है। रोडवेज की तय नीति के मुताबिक 1 से 4 सवारियों के बैरंग टिकट पाए जाने पर जोन के अंदर तथा 5 से 10 सवारियों के बैरंग पाए जाने पर जोन के बाहर कंडक्टरों का तबादला किया जाता है। मामलों का निस्तारण व्यक्तिगत सुनवाई के बाद जोनल मैनेजर हर महीने करते हैं, साथ ही बतौर सजा तबादला सूची जारी होती है। अजमेर जोन में अजमेर, अजयमेरू, ब्यावर, डीडवाना, नागौर और भीलवाड़ा आगार हैं। इन अजमेर आगार को छोड़ अन्य सभी आगारों की बसें अजमेर होकर कोटा मार्ग से गुजरती हैं। अकेले अजयमेरु आगार की 70 से अधिक बसें इस मार्ग पर संचालित होती हैं। कारण है छोटे स्टेशनों की भरमार कंडक्टरों की नजर में कोटा मार्ग में बैरंग टिकट की अच्छी कमाई है। कारण है इस मार्ग पर स्टेशनों की भरमार होना। इस कारण छोटी दूरियों के टिकट नहीं बनाने का फायदा उन्हें मिलता है। अजमेर- कोटा के बीच बसें नसीराबाद, गोयला, सराना, सरवाड़, केकड़ी, सावर, देवली, गुलगांव, रामगंज मंडी आदि स्टोपेज आते हैं। इस मार्ग चलने वाली बसों का यात्री भार औसतन 75 से 80 प्रतिशत चलता है। वहीं भोपाल और उज्जैन तक चलने वाली बसों को मध्यप्रदेश में लगातार जाकर चैक नहीं किया जाता। इस मार्ग पर अजमेर, बूंदी, कोटा और झालावाड़ जिले की विजिलेंस टीमों की नजर रहती है। वापस पहुंच जाते हैं अपनी डगर तबादला जोन में हो या फिर जोन के बाहर कंडक्टर घूम-फिर कर एक साल या इससे भी कम समय में अपने गृह आगारों में पहुंच जाते हैं। चित्तौड़ आगार से तबादला होकर अजमेर आगार में लगाए कंडक्टर नागेश को करीब एक साल बाद वापस चित्तौड़ लगाया गया। चूंकि मामला जोन के बाहर का था तो सीएमडी ऑफिस से जारी हुई सूची में उक्त कंडक्टर का नाम था। इसी तरह का एक मामला है सरदारशहर आगार के सुल्तान सिंह का। रिमार्क लगने पर बीकानेर आगार में उसे लगाया गया। 11 महीने बाद वापस रिमार्क लग जाने के बाद उसे सरदारशहर डिपो में लगाया गया। तबादले की सजा मिलेगी 'जिस मार्ग पर जितनी चैकिंग ज्यादा होगी, उतने ही मामले उस रूट पर पकड़े जाते हैं। चूंकि कोटा मार्ग का ट्रैफिक अन्य मागरेँ से ज्यादा रहता है। इस मार्ग से रोडवेज को आमद भी अन्य आगारों के मुकाबले ज्यादा हैं। ऐसे में मामले भी बनते हैं। रिमार्क पर कंडक्टरों के होने वाले तबादलों पर लगी रोक शुक्रवार से हटा दी गई है। अब वापस रिमार्क लगने पर कंडक्टर को तबादले की सजा मिलेगी।' -बीएल मीणा, जोनल मैनेजर एक साल में 750 पर लगा दाग अजमेर जोन में गुजरे एक साल में करीब साढ़े सात सौ कंडक्टरों के रिमार्क लगे हैं। व्यक्तिगत सुनवाई के बाद 80 प्रतिशत मामलों में तबादले किए गए। वहीं 10 प्रतिशत मामलों में कंडक्टरों को या तो संदेह का लाभ मिल गया, या फिर बात चार्जशीट देने तथा वेतनवृद्धि रोक लिए जाने की सजा से कंडक्टरों को रुकना पड़ा। 10 प्रतिशत मामलों में टिकट काटने के तय समय से पहले ही फ्लाइंगों के रिमार्क लगाए जाने के मामले सामने आए। जिन्हें कार्रवाई श्रेणी में नहीं लिया गया। तबादलों के आदेश पर रोक रोडवेज ने शुक्रवार को रिमार्क पर होने वाले तबादलों की रोक को हटा लिया है। अब रिमार्क लगने के बाद कंडक्टरों को तबादलों का सामना करना ही पड़ेगा। एक सप्ताह पहले रोडवेज मुख्यालय ने कंडक्टरों के रिमार्क नहीं लगने पर रोक लगा दी थी। रोडवेज की इसके पीछे मंशा स्टाफ की कमी की परेशानी को दूर करना था। मगर शुक्रवार को एक आदेश जारी रोडवेज ने इस तबादलों की रोक को हटा दिया। शुक्रवार को जयपुर मुख्यालय में सीएमडी मंजीत सिंह की अध्यक्षता में आहूत बैठक में जोनल मैनेजरों तबादलों को जारी रखने का आग्रह किया। इसके बाद रिमार्क के कारण होने वाले तबादलों पर लगी रोक को हटा दिया गया। शुक्रवार से ये आदेश यथावत हो गए। फैक्ट फाइल जोनकंडक्टर अजमेर 171 अजयमेरु121 ब्यावर 147 डीडवाना 110 नागौर 161 भीलवाड़ा 170

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