झालावाड़. जिले की अकलेरा तहसील के देवरीखेड़ा गांव के पूरीलाल 26 अगस्त 2011 को ही दुनिया छोड़ चुके, लेकिन भ्रष्टाचार ने उन्हें मौत के डेढ़ साल बाद तक जिंदा रखा। पूरीलाल ने 26 फरवरी 2013 तक सड़कें भी बनाई और पौधारोपण भी किया। अकेली बांसखेड़ी ग्राम पंचायत में ऐसे तीन मामले हैं।
बोरखेड़ी गांव की गजरीबाई और जगन्नाथ की मौत के बाद भी उनके नाम से मनरेगा में पैसा उठाया गया। हालांकि अब भी अधिकारियों का वही परंपरागत जवाब है कि मामले को दिखवाया जाएगा। मनरेगा में ऐसे घालमेल की सूचना मिली तो भास्कर ने ग्राम पंचायत में मनरेगा का पूरा रिकॉर्ड खंगाला। बाकायदा इन तीनों के नाम से कई महीने से भुगतान उठाया जा रहा है। यही नहीं इनके कामों को सूची में दर्ज भी किया गया।
मिलीभगत का खेल
मनरेगा में मृत व्यक्तियों के नाम पर पहले भी कुछ ग्राम पंचायतों में फर्जी बिल पेश कर पैसा उठा लिया गया था। इसके खिलाफ अभी तक संबंधित जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के खिलाफ केस चल रहे हैं। फिर ऐसे मामले जिले में सामने आ रहे हैं जो सरपंच, सचिव और बैंकों की मिलीभगत से चल रहे हैं।
अभी मुझे ज्वॉइन किए तीन दिन ही हुए हैं। तीन मृत व्यक्तियों का पैसा मनरेगा में उठाया गया है तो जांच करवाई जाएगी।
राजेश कुमार, एक्सईएन, मनरेगा, जिला परिषद झालावाड़