पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • "Many Companies Are Caught In The Maze Of Doctors'

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

'कंपनियों के चक्रव्यूह में फंसे हैं कई डॉक्टर’

9 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सीकर.डॉक्टर प्राइवेट कंपनियों के झांसे में न आए और जैनेरिक दवाओं पर ही जोर दें। कंपनियां गलत प्रचार भी करती है। बिना बीमारी के एक ही ब्रांड की पांच पांच प्रकार की दवा बनाकर बेची जा रही है। यह डॉक्टरों से ज्यादा कोई नहीं जानता। डॉक्टरों के लिए बनाए गए चक्रव्यूह को तोड़ना है। यह दावा राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉपरेरेशन के एमडी डॉ समित शर्मा ने किया। वे दवा वितरण योजना को लेकर शुक्रवार को जिला परिषद सभागार में आयोजित जिला स्तरीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब स्थिति बदलने भी लगी है। कुछ डॉक्टर अनावश्यक दवा लिखते हैं। दवाइयों की कमी नहीं है। कुछ कंपनियों द्वारा दवा सप्लाई में देरी करने पर अब तक उन पर छह करोड़ की पैनल्टी लगाई जा चुकी है। गड़बड़ी करने वाली कंपनियो को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में हर दिन दो लाख 33 हजार मरीज आते हैं और जैनेरिक दवा से प्रत्येक पर 30 रुपए खर्चा आता है। इतनी ही दवा यदि ब्रांडेड खरीद की जाए तो प्रति मरीज 300 से 500 रुपए खर्च हो जाएंगे। यदि सभी डॉक्टर जैनेरिक दवा लिखे तो मरीजों की जेब में 1500 करोड़ रुपए बच जाएंगे। सेमिनार में कलेक्टर धर्मेंद्र भटनार ने योजना को सफल बनाने के लिए किए गए प्रयासों का ब्यौरा दिया। संचालन सीएमएचओ डॉ बीएल सैनी ने किया। इस दौरान एडिशनल सीएमएचओ डॉ दिनेश पारीक, दांतारामगढ़ प्रधान भंवर लाल वर्मा, डिप्टी सीएमएचओ डॉ अशोक महरिया, आरसीएचओ डॉ सीपी ओला, कार्यवाहक पीएमओ डॉ बीएल राड़, जिला परियोजना अधिकारी डॉ एलके मौर्य के अलावा ब्लाक, सीएचसी व पीएचसी प्रभारी मौजूद थे। डॉक्टरों से पूछा क्या ऐसे होता है इन दवाओं का असर सेमिनार में स्क्रीन पर ब्रांडेड कंपनियों की प्रचार सामग्री दिखाते हुए एमडी ने डॉक्टरों से ही पूछा, क्या इन दवाइयों से ऐसा असर होता है। जैनेरिक से कुछ ब्रांडेड दवाइयां 14 हजार गुना महंगी है। गर्भवती महिला को उबकी आती ही है लेकिन कंपनियों ने इसे भी बीमारी बना दिया। ब्रिटेन में गर्भवती महिलाओं के दवा लेने से करीब आठ हजार बच्चे अपंग पैदा हुए। अब तक फेल हुए 80 सेंपल एमडी डॉ समित शर्मा ने बताया कि दो अक्टूबर, 2011 को शुरू हुई योजना में अब तक 6500 सेंपल लिए गए हैं। दैनिक भास्कर में सेंपल होने के समाचार का जिक्र करते हुए कहा, अभी तक प्रदेश भर में 80 सेंपल फेल हुए हैं। लैब में जांच कराने के बाद ही मरीजों को दवा दी जाती है। मेडिकल स्टोरों पर आने वाली दवाइयों की टेस्टिंग रिपोर्ट कंपनियां नहीं भेजती। ड्रग इंस्पेक्टर ही सेंपल लेते हैं। सेंपल फेल होने पर ही उस बैच की दवा की बिक्री पर रोक लगती है।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- सकारात्मक बने रहने के लिए कुछ धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में समय व्यतीत करना उचित रहेगा। घर के रखरखाव तथा साफ-सफाई संबंधी कार्यों में भी व्यस्तता रहेगी। किसी विशेष लक्ष्य को हासिल करने ...

और पढ़ें