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ऑफ द रिकॉर्ड:‘आपके कहने से विश्वास करें या एक्सपीरियेंस से?’

9 वर्ष पहले
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29 मार्च 1962 को राज्य विधानसभा में बजट (1962-63) के बजट पर चर्चा के दौरान ज्वाला प्रसाद शर्मा (नसीराबाद) आबकारी नीति एवं कर पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कह रहे थे :‘आज शराब पीने वालों से पूछिए तो सही, उसे पूरी बोतल में पावभर नशा भी नहीं दिया जाता। कारण इसका है, हमारी कुव्यवस्था।
इस पर भैरो सिंह शेखावत (किशनपोल बाजार) तत्काल खड़े होकर कहने लगे: आपके कहने पर विश्वास करें या एक्सपीरियेंस (अनुभव) से ?
ज्वाला प्रसाद बोले: ‘आप कहने की हिम्मत नहीं कर सकते। आपको इसका काफी पहले से एक्सपीरियेंस (अनुभव) है।’
भैरो सिंह: वह तो आपको और मुझको दोनों का साथ ही एक्सपीरियेंस हुआ है (सदन में हंसी का ठहाका लग पड़ा) । इस पर ज्वाला प्रसाद ने कहा ‘आप अपनी संस्कृति की वजह से दूर हैं।’ भैरो सिंह कब चूकने वाले थे। बोले कि, उनके वोट तो आपके पक्के हो गए। फिर ज्वाला प्रसाद ने शराब में हो रही मिलावट की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि आज गरीब 3 रु. कमाकर शराब की दुकान जाता है।
..यह सोचकर जाता है कि मैं एक रुपए की शराब पीऊंगा और दो रुपए बीवी को दे दूंगा, लेकिन जब वह पीता है तो उसको एक रुपए में नशा नहीं होता और वह दो रुपए की शराब पी जाता है..। इस पर श्री हरिराम घास (सिवाना) ने कहा ‘ उनकी यूनियन बना लीजिए और उसे रजिस्टर्ड करवा दीजिए (फिर सदन में ठहाका)