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ऑफ द रिकॉर्ड: ‘राजप्रमुख आर साइनिंग मशीन्स’

9 वर्ष पहले
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‘येराजप्रमुख क्या है? ये दस्तख्त करने की मशीन है।’ यह कथन था जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री पं.हीरालाल शास्त्री का। राजप्रमुख महाराजा मानसिंह के बारे में। शास्त्री जी ने देसूरी के किसान सम्मेलन में अप्रैल 1949 को भाषण दिया था।
इस सम्मेलन के समाचार संकलन करने गए दिल्ली के एक प्रमुख अंग्रेजी अखबारके वरिष्ठ संवाददाता चंद्रगुप्त वाष्र्णय ने इसे अपने पत्र को भेज दिया। अखबार ने इसे डबल कॉलम हैडलाइन में पहले पज पर हीरालाल शास्त्री के हवाले से छापा। दूसरे दिन शास्त्री जी किसी प्रदर्शनी का उद्घाटन करने अजमेर पहुंचे।
अजमेर पहुंचते ही वे सीधे वाष्ण्रेय जी से घर गए और कहा-वाष्ण्रेय तुम्हारे अखबार में मेरे भाषण की रिपोर्ट पढ़कर राजप्रमुख महाराजा मानसिंह बहुत नाराज हो गए और उन्होंने सरदार पटेल को फोन किया है। सरदार पटेल ने मुझे डांटा कि राजप्रमुख के बारे में ऐसी बात क्यों कही?
अब कोई तरकीब बताओं जिससे यह मामला ठंडा पड़ जाए। वाष्ण्रेय जी ने कहा कि आप इसका ‘कॅन्टड्रिक्शन’(खंडन) लिख कर भेज दो कि आपने ऐसा नहीं कहा था। फिर जब संपादक मुझसे जवाब तलब करेंगे तो मैं देख लूंगा। शास्त्री जी ने कहा मैं अपनी बात को कन्ट्राडिक्ट नहीं कर सकता। कोई उपाय बताओ।
शाम को जब शास्त्री जी वाष्ण्रेय के घर पहुंचे तो उन्होंने (वाष्ण्रेय) ने कहा किआप शाम को प्रदर्शनी के उद्घाटन भाषण में राजप्रमुख की तारीफ कर देना कि उन्होंने बहुत देश भक्ति का परिचय दिया है और राजकाज में आप उनकी सलाह लेते रहेंगे। शास्त्री जी ने वैसा ही भाषण दिया।
मुझे शास्त्रीजी ने कहा इस-इसे तुरंत अपने अखबार में भेज दो, क्योंकि मैं परसों राजप्रमुख से मिलने जाऊंगा। उससे पहले यह रिपोर्ट छप जाए और वे उसे पढ़ लें।
उस रात देर होने से वाष्ण्रेय जी रिपोर्ट भेज नहीं सके। शास्त्री जी जयपुर चले गए। लेकिन एक गाड़ी मेरे लिए छोड़ गए। जयपुर पहुंचकर मैंने रिपोर्ट तैयार की। शाम को मुझे हवाई जाहाज से दिल्ली भेजा।
मैंने संपादक जी को सारा हाल सुनाकर वस्तुस्थिति बता दी। उन्होंने उप संपादक को बुलाकर पहले पेज पर रिपोर्ट छापने के निर्देश भी दिए। दूसरे दिन मैं मार्निग एडीशन लेकर वापस जयपुर पहुंचा और अखबार की प्रति शास्त्री जी को देकर अजमेर चला गया। वाष्ण्रेय जी पर वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रकाश शर्मा लिखित पुस्तक में इस घटना का जिक्र है।