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PHOTOS:गेहूं की ऐसी दुर्दशा कर दी कि रोना आ जाए

9 वर्ष पहले
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गीली बोरियों से झांकती फफूंद और मिट्टी से सनी हुई गेहूं की घूघरी। साफ बता रही है कि एफसीआई ने किसानों की मेहनत की क्या गत कर दी है। शुक्रवार को भास्कर टीम केबल नगर के अस्थाई गोदाम में पहुंची तो यहां का हर हिस्सा बर्बादी बयां कर रहा था। हजारों टन गेहूं खुले आसमान के नीचे तिरपाल के सहारे रखा हुआ था। देखते-देखते बारिश आ गई और फिर से यह गेहूं भीगने लगा कोटा.किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया 60 हजार मीट्रिक टन गेहूं कोटा के पास केबलनगर में खाद्य निगम के अस्थाई गोदाम में बारिश में भीगकर खराब हो रहा है। खुले में कच्ची जमीन पर पड़े गेहूं के कट्टों के विशाल ढेर में से करीब 25 फीसदी गेहूं तो सड़ गलकर बदबू मार रहा है। चकित करने वाली बात यह कि इस गेहूं की ही सफाई कराके नए बारदानों में भर कर भंडारण के लिए बाहर भेजा जा रहा है। यही गेहूं गरीबों को सस्ता अनाज मुहैया कराने की सरकारी योजना के तहत बीपीएल-एपीएल परिवारों को बांटा जाएगा। पिछले तीन माह के दौरान कोटा में समर्थन मूल्य पर की गई गेहूं की 4 लाख 99 हजार मीट्रिक टन खरीद में से एफसीआई ने भंडारण के अभाव में 1.82 लाख टन गेहूं कोटा से करीब 25 किलोमीटर दूर केबलनगर में बंद पड़ी ओपीसी फैक्ट्री परिसर में डाला था। 1 जुलाई से इसका उठाव शुरू हो गया था। शुक्रवार दोपहर 12 बजे मौके पर पहुंचे संवाददाता ने देखा कि कच्ची जमीन पर पड़े गेहूं के कट्टों के ढेरो में से कई कट्टे पिछले दिनों से शुरू हुई बारिश में न सिर्फ भीग चुके थे, बल्कि यह गेहूं बुरी तरह सड़ांध मार रहा था। समूचा परिसर दलदल में तब्दील हो चुका है। सड़े गले गेहूं के ढेले बन गए थे और वहां बदबू के मारे खड़े रहना भी मुश्किल था। गेहूं सड़ने के कारण जो कट्टे फटकर खराब हो गए थे, उनसे फैक्ट्री परिसर में ही एक कमरा अटा पड़ा था। जिन ट्रकों में गेहूं भरकर जा रहा था, उनके ड्राइवर भी कह रहे थे, बारिश में भीग चुके गेहूं का भी लदान किया जा रहा है। करीब एक घंटे बाद ही बारिश शुरू हो गई तो गेहूं के कट्टों के ढेरों के आसपास पानी भर गया। गेहूं के वे कट्टे ही खराब होने से बच रहे हैं, जो ढेर के ऊपर रखे हैं। बारिश शुरू होने के बाद एफसीआई ने गेहूं के ढेरों पर बरसाती त्रिपाल डाले हैं। छोटे पड़ गए गोदाम कोटा संभाग में सरकार के गोदाम बहुत छोटे हैं। सरकार ने यहां उपज का महज २५ फीसदी हिस्सा ही खरीदा और उसको भी संभाल नहीं पा रही है। प्रमुख गोदामों की स्थिति- गोदाम भंडारण की क्षमता उपयोग कोटा नंबर 1- 33125 मीट्रिक टन 100 प्रतिशत नंबर 2- 45000 मीट्रिक टन 107 प्रतिशत नंबर 3- 25000 मीट्रिक टन 110 प्रतिशत :बारां 10 हजार मीट्रिक टन 100 प्रतिशत एफसीआई के गोदाम 7 गोदाम 1.72 लाख मीट्रिक टन 107 प्रतिशत एफसीआई के सवाईमाधोपुर में दो, बूंदी, के पाटन, कोटा, बारां एवं भवानीमंडी में एक-एक गोदाम हैं। इस तरह सात गोदामों की क्षमता 1.90 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न भरा हुआ है। गेहूं का ये हाल देखा तो अधिकारी को ढेर पर ले गए केबलनगर ओपीसी फैक्ट्री परिसर में खुले में पड़े समर्थन मूल्य का गेहूं खराब होने की सूचना मिलने पर भाजपा कार्यकर्ता शहर अध्यक्ष श्याम शर्मा के नेतृत्व में मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता वहां मौजूद एफसीआई कर्मचारियों पर जमकर बरसे। इस दौरान ही इस भंडारण केंद्र के मैनेजर केसी मीणा वहां पहुंचे और कहने लगे कि कुछ कट्टों का गेहूं ही खराब हुआ है। इस पर भाजपा प्रवक्ता योगेंद्र गुप्ता व किशन पाठक समेत अन्य कार्यकर्ता उन्हें सड़े गले गेहूं के ढेरों के बीच लेकर गए और उनके मुंह पर सड़े गेहूं फेंकते हुए कहा कि इस गेहूं को खाकर बताओ। इसके बाद मीणा वहां से खिसक लिए। भाजपा किसान मोर्चा के शहर अध्यक्ष मुकुट नागर, युवा मोर्चा शहर अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह चौहान, सुधाकर बहेड़िया आदि विरोध प्रदर्शन में मौजूद थे। पता था मानसून माथे पर, फिर क्यों नहीं किए इंतजाम 'जब पता था कि बारिश आएगी, फिर भी गेहूं को बचाने के इंतजाम नहीं किए। इसके लिए सरकार, मंत्री व अधिकारी जिम्मेदार हैं। जब घर में काम होता है तो सभी पूरी जिम्मेदारी से कार्य करते हैं। फिर गेहूं की खरीद व उसके भंडारण की व्यवस्था में अधिकारियों ने क्यों लापरवाही दिखाई। जब मध्यप्रदेश सरकार इसकी व्यवस्था कर सकती है तो राजस्थान सरकार क्यों नहीं। यह सरकार क्या टैक्स लेने के लिए है। खराब हुए गेहूं के लिए जिम्मेदारी फिक्स करके कार्रवाई की जानी चाहिए।' -राधेश्याम पोखरा, महासचिव कोटा ग्रेन एण्डा सीड्स मर्चेन्ट एसो 'गेहूं का भंडारण करने में सरकार विफल रही है, हालांकि गेहूं की खरीद से किसानों को कोई नुकसान नहीं हुआ, उनका तो गेहूं खरीदा गया। लेकिन, जनता के पैसे का तो नुकसान हो रहा है। यही गेहूं अगर गरीब जनता में बांटा जाता तो हजारों लोगों को भूखे पेट नहीं सोना पड़ता। गेहूं का पर्याप्त भंडारण नहीं होने से गेहूं खराब हुआ है। बारिश आने से पहले ही यह इंतजाम किए जाने थे। इसके लिए सीधे सरकार जिम्मेदार है। यह सरकार की असफलता को दर्शाता है।' -दशरथ कुमार, किसान नेता

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