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ऑफ द रिकार्ड: जोबनेर को जोबनेर और उदयपुर को उदयपुर की दृष्टि से देखा जाए

8 वर्ष पहले
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राजस्थान की दूसरी विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद के प्रस्ताव पर हुई बहस का उत्तर दे रहे थे मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया। वे अपना भाषण लगभग पूरा कर चुके थे लेकिन दूदू के विधायक रावल नरेन्द्रसिंह जोबनेर कृषि कॉलेज के बारे में कुछ पूछने को आतुर दिखे। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जोबनेर से आने वाले माननीय सदस्यों को भी कुछ तसल्ली हुई होगी।
लेकिन रावल नरेन्द्र सिंह फिर पांच मिनट बोलने का समय चाहते थे। इस पर उपाध्यक्ष निरंजन नाथ आचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के उत्तर के बाद यह सुविधा नहीं मिल पाएगी। नरेन्द्र सिंह एवं उपाध्यक्ष के कथन पर सदन हंस पड़ा। लेकिन मुख्यमंत्री ने फिर कहा कि जोबनेर के कृषि कॉलेज के बारे में उन्हें पूरी हमदर्दी है लेकिन यह मेरा दुर्भाग्य है कि नरेन्द्र सिंह जी इसे पूरी तौर पर नहीं मानते।
जब वे (नरेन्द्र सिंह) इस कॉलेज को चलाते थे तो मात्र 40-50 विद्यार्थी थे और सालाना बजट मात्र 86 हजार रुपए का था और आज इसका सालाना बजट 2 लाख 75 हजार रुपए का है। तो नरेन्द्र सिंह पूछ बैठे-उदयपुर का कितना है ? यह भी फर्मा दीजिए ? तो सुखाड़िया ने इस पर उदयपुर और जोबनेर का क्या मुकाबला (हंसी)? इस पर नरेन्द्र सिंह बोल उठे-मुकाबले का तो सवाल यह है कि वह 12 वर्ष का है और यह (उदयपुर) 5 वर्ष का ही है।
(फिर हंसी) तो मुख्यमंत्री ने कहा-जोबनेर कॉलेज को जोबनेर की दृष्टि से देखा जाएगा और उदयपुर कॉलेज को उदयपुर की दृष्टि से देखा जाएगा। इस पर पूरा सदन हंस पड़ा। लेकिन भैरोसिंह शेखावत (श्री माधोपुर) ने यह चुटकी ली कि दोनों को दोनों की दृष्टि से देखा जाएगा। फिर सदन में ठहाका लगा। इस पर सुखाड़िया बोले- दोनों को दोनों की दृष्टि से देखने के लिए एक्सपर्ट की दृष्टि से देखा जावे।
(फिर सदन में हंसी गूंज उठी)जब रावल नरेन्द्र सिंह फिर बोलने लगे तो उपाध्यक्ष ने उन्हें ‘ऑर्डर, ऑर्डर’ कह कर चुप करा दिया। लेकिन मुख्यमंत्री ने एक चुटकी लेते हुए उपाध्यक्ष से कहा-आप इसमें जब बीच में बोलते हैं तो मुझे कोई एतराज नहीं है। इसमें मुझे भी विश्राम मिल जाता है बीच-बीच में । फिर पूरे सदन में हंसी के फव्वारे छूट पड़े ।
दीवारों के कान
सरकार पर बढ़ेंगे भ्रष्टाचार के आरोप
जपा में अब किरीट सोमैया के दौरे बढ़ेंगे। यह फैसला प्रदेश नेतृत्व ने ले लिया है। जाहिर है सोमैया बार-बार आएंगे तो वे उतनी ही बार नए-पुराने मामले भी लेकर आएंगे। सोमैया तो यह तक कहते सुने गए हैं कि भ्रष्टाचारी कहीं भी हों उनके खिलाफ मुहिम कभी थमनी नहीं चाहिए।