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शहर के बगीचों का ठेका निरस्त करने की तैयारी में नगरपरिषद

7 वर्ष पहले
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भाजपाने शहरी सरकार की सत्ता संभालते ही कांग्रेस शासित बोर्ड के कार्यकाल में निजी हाथों में सौंपे गए शहर के बगीचों का ठेका रद्द करने की तैयारी कर ली है। नगरपरिषद चेयरमैन महेंद्र बोहरा ने आयुक्त के नाम पर नोटशीट जारी कर इन बगीचों का नए सिरे से ठेका देने तथा कई बगीचों को सरकारी बागवानों से विकसित कराने की राय जाहिर की है। बोहरा के आदेश के बाद ठेकेदारों में खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि अधिकांश बगीचों का ठेका गत बोर्ड के पार्षद के नजदीकी लोगों के पास होने तथा पर्याप्त राशि चुकाने के बाद भी इन बगीचों को विकसित नहीं करने के चलते भाजपा बोर्ड ने यह निर्णय लिया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार शहर में वर्तमान में कुल 43 बगीचे हैं। इनमें से लाखोटिया, नेहरू पार्क, हाउसिंग बोर्ड का शहीद भगतसिंह पार्क, साइंस पार्क तथा शहीद स्मारक ही विकसित है। शेष पार्कों की स्थिति काफी दयनीय है। नगरपरिषद के गत बोर्ड ने शहर के 22 बगीचों की सार-संभाल करने तथा इनको हरियाली से आच्छादित करने के लिए ठेकों पर दे दिए थे। ठेके पर जाने के बाद इक्का-दुक्का बगीचे की हालत को सुधर गई, मगर शेष की स्थिति आज भी जय की तस बनी हुई है। इसके चलते नगर परिषद को प्रतिमाह ठेकेदार को दी जाने वाली राशि का खर्च व्यर्थ ही भुगतना पड़ रहा है। शेष| पेज 13



यहसकती है समस्या

कई पार्क इस वक्त काफी बेहतर स्थित में हैं, लेकिन अचानक इनके रखरखाव के ठेके रद्द किए जाने के बाद यह मुश्किल आएगी कि नए ठेके जारी होने तक इनकी देखभाल और रखरखाव का काम कौन करेगा ? अधिकारी खुद मानते हैं के पार्कों का नए सिरे से टेंडर करने में कम से कम 20 से 25 दिन का वक्त लग सकता है ऐसे में लाखोटिया, शहीद उद्यान

भास्कर ने भी बगीचों को लेकर उठाए थे सवाल

भास्करने भी नगर परिषद सीमा के बाग बगीचों पर लाखों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी इनकी दुर्दशा और खराब हालत को लेकर सवाल उठाए थे, उसी के तहत मामले को गंभीरता से लेते हुए नए बोर्ड ने ठेके पर की जरूरत पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया है।

^शहर के बगीचों को ठेके पर देने के बाद भी इनका उचित रखरखाव नहीं हो पा रहा है। इस बारे में नागरिकों से लगातार शिकायतें मिल रही थी। बगीचों के बेहतर रखरखाव के लिए ठेके रद्द करने पर विचार किया जा रहा है। इस बारे में शीघ्र ही निर्णय ले लिया जाएगा। इस बारे में कमिश्नर को न