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चिंता की अग्नि जिंदा को जलाती है : प्रीतमदास
गीतासत्संग भवन में रविवार को प्रीतमदास महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि भक्ति में आडम्बर नहीं होना चाहिए। भक्ति गुप्त होनी चाहिए, भगवान के मिलने पर तो चौगुना फायदा होता है। उन्होंने कहा कि चिता की अग्नि ताे मुर्दे को जलाती है, लेकिन चिंता की अग्नि जिंदा को जलाती है। भगवान राम स्वभाव के कारण सबके प्रिय थे। जनकल्याणकारी संदेश में कहा कि जिंदगी हो, लेकिन परोपकार के लिए हो। जीवन में आचरण की कीमत है। यदि चरित्र गया तो सबकुछ चला गया। इस अवसर पर स्वामी वलानंद, डाॅ. केएम शर्मा, अंबालाल सोलंकी, बाबूलाल सोनी, शिवजी मालवीय, श्रवणसिंह, तुलसीदास भीष्म खेमनाणी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे।
> पाली. गीता भवन में प्रवचन देते संत।