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इकलौता ऐसा बांध, जिसका पानी व्यर्थ बहाना पड़ता है

7 वर्ष पहले
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पाली. शहर की फैक्ट्रियों से निकलने वाले रंगीन पानी ने बांडी नदी के आसपास आबाद कृषि कुओं को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। ये कुएं अब जहरीला पानी उगल रहे हैं। साथ ही करीब 40 किमी दायरे में खेतों की जमीन भी अपनी उर्वरा शक्ति को खोती जा रही है।
यह चौंकाने वाली रिपोर्ट देश की प्रमुख पर्यावरणविद् सुनीता नारायण की संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की है। संस्था के सदस्यों ने ट्रीटमेंट प्लांटों, बांडी नदी, नेहड़ा बांध तथा 30-40 किमी क्षेत्र में आबाद कुओं से पानी के सैंपल लिए थे।
सैंपलों की रिपोर्ट में इस पानी को मानव मवेशियों के जीवन के लिए खतरनाक माना है।दो माह पूर्व पाली की प्रमुख प्रदूषण समस्या को लेकर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की टीम ने पाली आकर यहां की रंगाई-छपाई की इकाइयों से निकलने वाले घातक रसायनयुक्त पानी को लेकर हो रही परेशानी को देखते हुए कुल 15 स्थानों से पानी के सैंपल लिए थे।
इन सदस्यों ने फैक्ट्रियों से निकलने वाले रंगीन पानी को ट्रीट करने के लिए लगे ट्रीटमेंट प्लांटों के इनलेट आउटलेट, फैक्ट्रियों के आगे से गुजर रहे नालों, बांडी नदी, नदी के किनारे पर आबाद कृषि कुओं तथा नेहड़ा गांव के आसपास आबाद अन्य पेयजल तथा सिंचाई के स्रोतों से कुल 15 सैंपल लिए थे।

इन सैंपलों की संस्था की तरफ से कराई गई जांच के दौरान सभी सैंपल निर्धारित मानक पर खरे नहीं उतर पाए हैं। सीएसई के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस पानी में शामिल तत्व इतने घातक हैं कि यह जमीन, पानी तथा पेयजल स्त्रोत को पूरी तरह से बर्बाद कर रहा है। इसके सेवन से मानव जीवन को खतरा होने के साथ ही इस पानी से आसपास के क्षेत्र में आबोहवा भी दूषित हो रही है।

आज संस्था रिपोर्ट करेगी सार्वजनिक

सीएसईके प्रतिनिधि इस रिपोर्ट को आम लोगों के नाम जारी कर उनको जागरूक करने के लिए गुरुवार को पाली रहे हैं। संस्था की कॉर्डिनेटर स्वाति सिंह की अगुवाई में पहुंच रही टीम यहां पर रोहट क्षेत्र के किसानों को जागरूक करने तथा प्रदूषण की समस्या को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ इस रिपोर्ट को लेकर विस्तृत रूप से चर्चा करेगी।