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- चार साल पहले नदी में गाड़े शव का राज खुला, बड़े भाई ने दामाद के साथ मिलकर की थी हत्या
चार साल पहले नदी में गाड़े शव का राज खुला, बड़े भाई ने दामाद के साथ मिलकर की थी हत्या
पाली| सदरथाना क्षेत्र के गिरादड़ा गांव में 2010 में नदी में गाड़े गए शव का राज चार साल बाद पुलिस ने खोला है। औद्योगिक थाना पुलिस का कहना है कि सांवलता कलां गांव के लादूदास उर्फ लक्ष्मीनारायण वैष्णव (40) की उसके बड़े भाई सत्यनारायण वैष्णव ने अपने दामाद भगवानदास के साथ मिलकर हत्या की थी। ये दोनों आरोपी पाली में हाउसिंग बोर्ड इलाके में रहते हैं, जिन्होंने हाउसिंग बोर्ड में हत्या कर सबूत नष्ट करने के लिए ससुर-दामाद ने युवक का शव ट्रैक्टर-ट्राॅली में ले जाकर गिरादड़ा गांव की नदी में गाड़ दिया था। 20 जुलाई 10 को गिरादड़ा गांव में नदी में एक व्यक्ति का शव गड़ा मिला था। पुलिस ने काफी छानबीन की, लेकिन मृतक की शिनाख्त नहीं होने पर शव का अंतिम संस्कार करवा दिया। मृतक की शिनाख्त लादूदास उर्फ लक्ष्मीनारायण वैष्णव निवासी सांवलता कलां के रूप में हुई थी, जिसके चचेरे भाई ने इस संबंध में हत्या का मुकदमा 2011 में कराया था। ब्लाइंड मर्डर के इस केस की फाइल लंबे समय से पेंडिंग चल रही थी। एसपी टांक ने हत्या के इस मामले की जांच एएसपी जयपाल यादव सीओ सिटी रामदेव जलवानिया के निर्देशन नए सिरे से कराई। औद्योगिक थाना प्रभारी नरेंद्र शर्मा एएसआई राजूसिंह बाबूलाल राणा की टीम ने मामले की छानबीन के बाद गुरुवार रात को हाउसिंग बोर्ड निवासी सत्यनारायण वैष्णव (50) उसके दामाद भगवानदास को गिरफ्तार किया।
हत्याके बाद शव गाड़ा, लेकिन हाथ बाहर रह गया था : गिरादड़ागांव की नदी में एक जगह किसी व्यक्ति का हाथ दबा हुआ देखा गया था। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने नदी में उस जगह की खुदाई कराई तो वहां गड़ा हुआ शव मिला था। औद्योगिक थाना प्रभारी शर्मा ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड में रहने वाले ससुर-दामाद ने लादूदास की गला दबाकर हत्या की और बाद में शव गिरादड़ा गांव के पास नदी में गाड़ दिया। रात के अंधेर में हड़बड़ाहट में आरोपियों ने नदी में गड्ढा खोदा और शव उसमें गाड़ दिया, लेकिन एक हाथ बाहर ही रह गया। तब जाकर पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ।
अवैध संबंध और संपति विवाद है हत्या की वजह
पूछताछमें पता चला है कि लादूदास की प|ी दोनों बच्चों के साथ हाउसिंग बोर्ड में अपने जेठ सत्यनारायण के घर ही रहती थी। मृतक लादूदास अपने आप को संत बताते हुए गांव-गांव में यूं ही घूमता था। बताया जाता है कि उसका दिमागी संतुलन भी ठीक नहीं था। सा