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फूटरो पाली के बाद अब \"साफ सुथराे\' पाली का नारा
निर्मलभारत अभियान के तहत पूरे जिले को खुले में शौच मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे फूटरो पाली अभियान के तहत अब इसमें एक और नया नारा जोड़ दिया गया है साफ सुथराे पाली। साथ ही मिशन के लक्ष्य को पूरा करने वाले गांवों को प्रोत्साहित करने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार से नल जल योजना की सिफारिश भी की जाएगी। सोमवार को पाली पंचायत समिति सभाकक्ष में हुई सरपंचों की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
पंचायत समिति के बीडीओ मोहित दवे की अध्यक्षता में हुई बैठक में अभियान में अब तक की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा भी की गई। साथ भांवरी गांव के सबसे पहले इस लक्ष्य के पूरा होने पर बीडीओ ने बाकी ग्राम पंचायतों से भी इससे प्रेरणा लेकर अपने ग्राम को खुले में शौच मुक्त करने का आह्वान किया।
गांव को मिलेगा नल से पेयजल
अभीराज्य सरकार ने पांच हजार की जनसंख्या को आधार बनाकर गांवों के लिए नल से पानी दिए जाने की व्यवस्था की है। अब जिला परिषद जनसंख्या को अाधार बनाने की बजाए साफ सफाई, गांवों के विकास के साथ साथ शौचालय बनाकर उसके उपयोग की संख्या को आधार बनाकर राज्य सरकार से गांवों में नल से पेयजल उपलब्ध कराने की सिफारिश करेगी।
नयानाम, नया प्रस्ताव
फूटरोपाली के नाम से योजना शुरू कर गांवों की दशा सुधारने की जिला परिषद ने कोशिश की थी और अब आमजन की सहभागिता के बाद इस दिशा में काफी सुधार भी हुआ है ऐसे में अब एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सरपंचों को साफ सुथरो पाली का नया नारा दिया है। इसके तहत गांवों में खुले में शौच को पूर्ण रूप से बंद कराते हुए शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य पूरा करने के साथ साथ पॉलीथिन का बहिष्कार करने का संकल्प दिलाया गया।
कैसे पूरा हो लक्ष्य ?
जहांपरिषद के अधिकारी बार बार शौच मुक्त गांव की बात कह रहे थे वहीं ज्यादातर सरपंचों ने अपनी समस्याओं से भी उन्हें अवगत करवा दिया। सरपंचों की माने तो एक तो सरकार द्वारा दी जा रही 10 हजार रुपए की राशि शौचालयों के निर्माण के लिए बहुत कम है ऊपर से शौचालय बना देने वाले कई लोगों को यह राशि अभी तक नहीं मिली है। सरपंचों के मुताबिक महंगाई के इस दौर में शौचालय की चारदीवारी और दरवाजे बनवाने पर ही 10 हजार से अधिक की रकम खर्च हो जाती है। ऊपर से गटर बनाने के लिए 12 से 15 हजार रुपए अलग से लग जाते हैं। सरपंच चाहते हैं कि सरकार राशि बढाए तो