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साइंस पार्क की दो साल में ही हो गई दुर्दशा
बच्चों की गंदगी और कीचड़ के बीच खेलने की मजबूरी
साइंसपार्क में आने वाले बच्चों के मनोरंजन के लिए यहां पर झूले और फिसलपट्टियां लगाई गई हैं लेकिन यहां पानी के लीकेज से कीचड़ जमा हो गया है। कई बार यह बच्चों के लिए दुर्घटना की वजह भी बन रहा है।
दो साल पहले बना, अब अनदेखी का शिकार
तत्कालीननगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने विधायक ज्ञानचंद पारख और तत्कालीन चेयरमैन केवलचंद की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में 3 मई 2013 को इस पार्क का लोकार्पण किया था। दो साल में बनकर तैयार हुए इस पार्क के एक तरफ की दीवार के पास उल्लू, मेंढक, पेंग्विन, किंग कोबरा, कंगारू, खरगोश, तितलियां, हिरण अौर शेर जैसे कई मॉडल बनाए गए हैं। लेकिन साफ-सफाई के अभाव में ये अपनी सुंदरता खो रहे हैं।
शहर के पार्क हमारी धरोहर हैं। इनके रखरखाव और सफाई का जिम्मा हमारा भी है। एक सजग नागरिक के नाते हम भी इसे संवारने में पहल कर सकते हैं।
साइंस पार्क में विज्ञान के मॉडल तो खराब पड़े ही हैं, कीचड़ फैलने के साथ बच्चों के झूले भी टूट रहे हैं। फोटो:भास्कर