- Hindi News
- ससुर नहीं बन पाए जिला प्रमुख, बहू ने पूरा किया सपना
ससुर नहीं बन पाए जिला प्रमुख, बहू ने पूरा किया सपना
{2010 में क्रॉस वोटिंग के कारण सिरोही भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष स्व. विनोद परसरामपुरिया जिला प्रमुख नहीं बन पाए {हार से आहत होकर उन्होंने कभी जिला परिषद में पांव तक नहीं रखा, बहू जिला प्रमुख बनी तो पूरा परिवार रो पड़ा उन्हें याद कर
भास्करन्यूज | पाली
सिरोहीकी नवनिर्वाचित जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया का इस पद पर पहुंचना कोई राजनीतिक मायने नहीं रखता। उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उनके ससुर का सपना उन्होंने पूरा किया। शनिवार को जब पायल जिला प्रमुख निर्वाचित हुई तो यह उनके और पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक क्षण था। चारों ओर कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ थी, जयकारे लग रहे थे, समर्थक फूल मालाएं लिए बधाइयां दे रहे थे, लेकिन इन सबके बीच उन्हें सिर्फ रह-रहकर अपने ससुर स्व. विनोद परसरामपुरिया की याद रही थी। उनके, पति अरुण और परिजनों की आंखों से झर-झर आंसूओं की धार बह रही थी।
पांच साल पहले 2010 में इसी जगह पर ससुर विनोद परसरामपुरिया बहुमत के बावजूद क्रॉस वोटिंग के कारण महज एक वोट से जिला प्रमुख का चुनाव हार गए थे। तब वे इतने आहत हुए थे कि उसके बाद उन्होंने कभी जिला परिषद में पैर तक नहीं रखा। तब घर जाकर उन्होंने परिवार के सदस्यों से इतना ही कहा था कि एक दिन जीत हमारी होगी। आज ससुर का सपना पूरा कर पायल परसरामपुरिया को बेइंतहा खुशी हो रही है।
बहू ने ठाना, सपना होगा पूरा
पायलपरसरामपुरिया को उस समय बमुश्किल एक साल भी नहीं हुआ था। वे इस परिवार में बड़ी बहू बनकर आई थीं। इससे पहले उनका राजनीति से कोई वास्ता नहीं था। शादी के एक साल बाद ही परिवार में राजनीतिक चर्चाएं तेज थीं। चुनावों की तैयारियां हो रही थीं। दिनभर सैकड़ों लोग घर पर आते जाते। रणनीति बनती और समीकरण जोड़े तोड़े जाते। वे यह सब देखती और सुनती, लेकिन फिर कुछ ही दिन बाद पार्टी के ही भीतरघात से मिली हार के कारण उन्होंने हमेशा खुश मिजाज रहने वाले अपने ससुर को आहत होते भी देखा। इस चुनाव के दो साल बाद ही विनोद परसरामपुरिया का निधन हो गया। परिवार बुरी तरह से सदमे था, लेकिन पायल परसरामपुरिया ने तभी ठान लिया था कि वे दिवंगत ससुर के सपने को पूरा करेंगी और उनके निधन के दो साल बाद यह सपना पूरा हुआ।
हमेशा बेटी माना
^घरमें हम दो बहुएं हैं। उन्होंने हमेशा हमें बेटी की तरह माना। एक पल के लिए भी यह अहसास नहीं होने दिया कि हम उनकी बहू हैं। उस हार के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वे हमेशा खुश ही रहते, लेकिन उनके मन में जो पीड़ा थी उसे हमने करीब से देखा। इस चुनाव में जब यह अवसर मिला तो उनके समर्थकों और हमने वह अधूरा सपना पूरा करने में कोई कसर नहीं रखी। यह जीत उनको और पूरी जनता को समर्पित है। मैं उनके बताए मार्ग पर चलकर जनता की सेवा करूंगी। -पायलपरसरामपुरिया, जिला प्रमुख, सिरोही