पाली. देसूरी की नाल में जिस जगह पर स्कूली बस पलटी वह डेंजर जोन में अाता है। आठ किलोमीटर तक सड़क संकरी है। विकट मोड़ भी हैं। इस कारण आए दिन यहां हादसे होते रहते हैं। सात साल पहले करीब डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर ट्राेला पलटने से 89 लोगों की जानें गईं थीं। इसके बावजूद सड़क में सुधार नहीं किया गया है। पंजाबी पुलिया के पास सिर्फ एक पुलिया बना दी गई।
सड़क की चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई है। सड़क खस्ताहाल है। पाली-चारभुजा मेगा हाइवे के तहत इसको चौड़ा करना है, लेकिन आठ किलोमीटर तक देसूरी की नाल की यह सड़क चौड़ी नहीं हो पाई है। वन्य जीव बोर्ड को रिपोर्ट नहीं आने से सड़क की स्थिति नहीं सुधरी है। हालांकि, वन विभाग का कहना है कि देसूरी की नाल से पाली रोड पर सड़क चौड़ा करने के संबंध में राजसमंद वन विभाग से कोई काम अटका नहीं है। वन संरक्षण अधिनियम के तहत सड़क निर्माण करने वाली कंपनी को स्वीकृति दी जाती है। राजसमंद वन विभाग की ओर से पॉजिटिव कमेंट के साथ राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड को रिपोर्ट भेज दी गई है। वहां से स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
पंजाब मोड़ पर सबसे ज्यादा हुई दुर्घटना
देसूरी-चार भुजासड़क मार्ग पर सबसे खतरनाक मोड पंजाब मोड है। यहां पर सबसे ज्यादा दुर्घटना हो चुकी है, जिसका मुख्य कारण चारभुजा से आने वाले वाहनों के ब्रेक फेल होने या संतुलन बिगड़ने के बाद पंजाब मोड़ पर मौजूद चट्टानों से वाहन टक्कर मार देते, जिससे वहां पर बड़ा हादसा हो जाता है। इस मोड़ पर इतनी दुर्घटना होने के बावजूद प्रशासन द्वारा इसे दुरूस्त करने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे इस मोड़ पर होने वाली दुर्घटना को रोका जा सके।
स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य होगा शुरू
देसूरी-चार भुजा क्षतिग्रस्त सड़क मार्ग का निर्माण मेगा हाईवे के तहत किया जाना था। मगर विभाग द्वारा विरोध करने के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। विभाग के अधिकारियों की बैठक 12 अगस्त, 2014 को केंद्र सरकार के साथ हुई, जिससे उम्मीद है कि शीघ्र ही निर्माण कार्य की स्वीकृत केंद्र सरकार से मिल जाएगी। -मदनलालपरिहार, एईएन,राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम, देसूरी
विभाग से स्वीकृति नहीं मिली
हमारे पास वन विभाग से सड़क चौड़ी करने के संबंध में लिखित में स्वीकृति नहीं अाई है। अगस्त महीने में राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड में भी मुद्दा उठा चुके हैं।