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चार महीने बाद भी अधिकारियों ने नहीं दिखाई जांच में तत्परता

7 वर्ष पहले
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सोलर लाइट खरीद घोटाले में दो अधिकारियों को नोटिस

कार्रवाई

जिलेमें सोलर लाइट खरीद मामले में घोटाले की जांच में ढिलाई बरते जाने को लेकर जिला परिषद के सीईओ आशुतोष गुप्ता ने अपने दो एक्सईएन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन दोनों अधिकारियों को इस मामले की शीघ्र जांच कर रिपोर्ट देने और उसके बाद भी रिपोर्ट नहीं मिलने पर रिमाइंडर भेजा था। बावजूद इसके अब तक जांच को लेकर गंभीरता नहीं बरते जाने के बाद उन्होंने दोनों अधिकारियों को यह नोटिस जारी किया। इस नोटिस का उनसे एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की आईडब्ल्यूएमपी योजना के तहत जिले में 2011 से 2013 के बीच 10 पंचायत समितियों में कुल 6980 सोलर लाइट खरीदने को मंजूरी मिली थी, ताकि गांवों को रोशन किया जा सके। इसके लिए प्रति लाइट करीब 21,800 रुपए की दर भी तय की गई थी, लेकिन पाली, रोहट और मारवाड़ जंक्शन के कई गांवों के लिए ना केवल घटिया सोलर लाइट काफी अधिक दामों पर खरीदी गई, बल्कि 14 हजार रुपए में खरीदी गई सीएफएल लाइट को भी सोलर लाइट बता दी गई। मामला सामने आने पर पंचायतीराज विभाग के आयुक्त शासन सचिव की ओर से सोलर लाइट लगाने पर रोक लगा दी तथा मामले की जांच का आदेश दिया।

ऐसे हुआ था सोलर लाइट की खरीद में घपला

चार महीने बाद भी नहीं मिली जांच रिपोर्ट

इसघपले की जांच और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए तीन कमेटियां बनाई गई थीं जिसे तीन महीने के भीतर भौतिक निरीक्षण और सत्यापन के बाद जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था। इस जांच रिपोर्ट को 1 दिसंबर को जयपुर में हुई अधिकारियों की बैठक में रखा जाना था, लेकिन अब तक भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं होने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

इन अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस

सीईओकी तरफ से जल संसाधन विभाग के एक्सईएन एके सोनगरा और ईजीएस के एक्सईएन रिनेश सिंघवी को यह नोटिस जारी किया है। नोटिस में इस साल 12 अगस्त, 16 अक्टूबर 27 अक्टूबर और 27 नवंबर की का भी उल्लेख है जिसमें इन्हें मामले की जांच रिपोर्ट को लेकर रिमाइंडर भेजा गया था।