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इलाज और दवाइयों का रिकाॅर्ड रहेगा ऑनलाइन
दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को अब बीमारी के उपचार के लिए शहर अथवा कस्बों में विशेषज्ञों अथवा सीनियर डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें अब अपने गांव में ही बेहतर चिकित्सा के साथ शहरों के विशेषज्ञों का परामर्श ऑनलाइन ही मिल जाएगा। यूनिसेफ जोधपुर आईआईटी की ओर से एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है जिसकी मदद से गांव में तैनात एएनएम अथवा कंपाउडर ऑनलाइन डॉक्टर से परामर्श लेकर मरीज का इलाज कर सकेंगे। जिला प्रशासन की आेर से परीक्षण के तौर पर पायलेट प्रोजेक्ट के तहत इसी सॉफ्टवेयर वाले टेबलेट जिले के चयनित चिकित्सा कर्मियों को उपलब्ध कराए गए हैं। इस तकनीक से जिले के डॉक्टर चिकित्साकर्मी अपडेट जानकारी के साथ ऑनलाइन रहकर मरीजों का उपचार कर सकेंगे।
पाली की दस एएनएम को दिए टेबलेट
यूनिसेफजोधपुर आईआईटी द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर के टेबलेट शुरुआती तौर पर पाली उपखंड क्षेत्र की 10 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएनएम) को दिए गए हैं। ये सभी एएनएम दवा वितरण, वेक्सिन का प्रयोग तथा उपचार की दिनचर्या का डाटा टेबलेट में रखेंगी। साथ ही टेबलेट के इस्तेमाल में सॉफ्टवेयर को लेकर अपने अनुभव के साथ दिक्कतें भी बताएंगी। प्राप्त अनुभवों के आधार पर सॉफ्टवेयर में जरूरी हुआ तो बदलाव करने के बाद जिलेभर में सभी स्वास्थ्य कर्मियों को इस सॉफ्टवेयर वाले टेबलेट दिए जाएंगे।
मरीज के साथ विभाग को भी होगा फायदा
स्वास्थ्यएवं चिकित्सा विभाग में वर्तमान में जितने भी स्वास्थ्य केंद्र अथवा उप स्वास्थ्य केंद्र हैं, उनमें एएनएम कंपाउडर समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी मरीज को प्राथमिक तौर पर उपचार दे रहे हैं। यानी, उल्टी-दस्त, बुखार अथवा सर्दी-जुकाम जैसी बीमारी में मरीज की जांच कर स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध दवाई या वैक्सीन दे रहे हैं। मरीजों को दी जाने वाली दवाइयों का रिकाॅर्ड भी फिलहाल रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। इस सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जिले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारी ऑनलाइन रहेंगे, जिसके चलते डॉक्टर से परामर्श लेकर मरीज को विभिन्न तरह की दवाइयों का भी परामर्श दे सकेंगे। सॉफ्टवेयर के डाटा बेस में ऑनलाइन दवाइयों का रिकाॅर्ड भी देखा जा सकेगा, जिसके चलते बीसीएमएचओ, पीएमओ अथवा सीएमएचओ भी जरूरत के हिसाब से उस स्वास्थ्य केंद्र तक दवाइयों की सप्लाई करा सकेंगे।
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