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नहीं हुई डीएलसी की बैठक, कल से स्वत: बढ़ेगी 15 फीसदी दरें

7 वर्ष पहले
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जिलेमें ढाई साल से जमीनों की रेट तय करने के लिए जिला स्तरीय कमेटी (डीएलसी) की बैठक नहीं हुई है। राज्य सरकार के निर्देश पर इस साल 30 सितंबर से पहले यह बैठक आयोजित करनी थी। लेकिन नहीं हुई। अब इसकी संभावना कम है कि मंगलवार को यह बैठक हो। लेकिन सरकार के नियमानुसार 1 अक्टूबर से डीएलसी की 15 फीसदी बढ़ी हुई स्वत: प्रभावी हो जाएंगी। डीएलसी की बैठक होती तो संभव था कि यह बढ़ोतरी 10 फीसदी ही होती। हालांकि जिला प्रशासन ने दो बार इस बैठक के लिए तिथि भी तय की लेकिन किसी कारण से नहीं हो पाई।

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अबयह बैठक तो हो सकती है लेकिन रेट इससे कम नहीं हो सकती।

हां, कमेटी 15 फीसदी से भी ज्यादा दरें बढ़ाने की सिफारिश करे तो वो लागू हो सकती हैं। पूरे जिले में आवासीय और व्यावसायिक जमीनों के भाव तय करने के लिए जिम्मेदार डीएलसी की बैठक इस साल भी नहीं होने का खामियाजा विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को ज्यादा भुगतना पड़ेगा। जिन जगहों पर अभी जमीनों के बाजार भाव नहीं बढ़े हैं वहां भी अब दरें स्वत: ही 15 फीसदी बढ़ी हुई प्रभावी होंगी। डीएलसी की आखिरी बैठक 26 मार्च, 2012 को हुई थी, जिसमें डीएलसी दर में 10 फीसदी बढ़ोतरी की थी।

ढाईसाल से मीटिंग नहीं होने के कारण बढ़ेंगी 15 फीसदी दर : राज्यसरकार ने इसी साल बजट में प्रावधान किया था कि 30 सितंबर तक डीएलसी की मीटिंग होना जरूरी है। सरकार का मानना था कि कई जिलों में नियमित मीटिंग नहीं होने के कारण सरकार को राजस्व की हानि हो रही है। इसलिए यह फैसला लिया था कि जहां बैठक नहीं होंगी लेकिन पिछले साल हुई थी, वहां स्वत: 10 फीसदी रेट बढ़ी हुई मान ली जाएगी। जहां इस वर्ष भी बैठक नहीं हुई और पिछले साल भी नहीं हो पाई थी वहां 15 फीसदी दरें बढ़ी हुई प्रभावी हो जाएंगी।

इलाकेवारतय होते हैं प्रस्ताव : जिलालेवल कमेटी (डीएलसी) के अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं। विधायक, प्रधान आदि इसके सदस्य होते हैं। मीटिंग से पहले सभी इलाके वार संशोधित डीएलसी दर के प्रस्ताव लेते हैं। मीटिंग में सबकी सहमति से नई दर तय की जाती है।

जमीन की सरकारी वेल्यू है डीएलसी दर

सरकारकी ओर से इलाकेवार जमीन की अलग-अलग कीमत तय की जाती है। इसे जमीन की सरकारी वेल्यू कहा जाता है। जमीन खरीद पर इसी कीमत से स्टांप ड्यूटी रजिस्ट्री पंजीयन शुल्क तय होता है। इसके आधार पर ही मुआवजा तय होता है।