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- \"जाना था गंगा पार, प्रभु केवट की नाव चढ़े\'
\"जाना था गंगा पार, प्रभु केवट की नाव चढ़े\'
रामलीलामैदान में रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित हो रहे रामलीला मंचन के तहत सोमवार को भरत आगमन से लेकर सूर्पणखा के प्रसंग का मंचन किया गया। रामलीला कमेटी के प्रवक्ता मांगु सिंह दूदावत ने बताया कि भगवान श्रीराम के वनवास के लिए रवाना होने तथा भरत की आेर से अपने बड़े भाई राम को मनाने वापस अयोध्या चलने का निवेदन करने की सुंदर प्रस्तुति दी गई। रामलीला के चौथे दिन हुए रामायण के विभिन्न प्रसंगों के साथ भगवान श्रीराम के गंगा नदी को पार करने के लिए केवट से कहने पर पहले उसके इनकार करने और बाद में श्रीराम के चरण धोकर नाव में बैठाने का आग्रह करने के बाद श्रीराम, लक्ष्मण सीता को नाव से नदी पार कराई। इस बीच भरत द्वारा ननिहाल से अयोध्या लौटकर माता कैकेयी से राजा दशरथ के देहांत हाेने भगवान राम, लक्ष्मण सीता के वन में चले जाने का पता चलने पर बहुत दुखी होने के साथ ही भरत का वन में जाकर राम से मिलने राम द्वारा भरत को खड़ाऊ देने वाले प्रसंग को बेहद भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया। भरत की विदाई के दृश्य को देख दर्शकों की आंखें भर आई। वन में श्रीराम लक्ष्मण द्वारा राक्षसों का वध करने का मंचन किया गया। इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष तेजसिंह मांगलिया, हरबंशसिंह, मानमल लसोड़, नरेंद्र चारण, प्रकाश चौधरी देवीलाल पंवार सहित कमेटी के पदाधिकारी बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।
>पाली. सीता, राम लक्ष्मण को गंगा पार करवाता केवट।