पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अब बायोमैट्रिक्स मशीन से मिलेगी राशन सामग्री

अब बायोमैट्रिक्स मशीन से मिलेगी राशन सामग्री

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
राशन की दुकानों पर भी उपभोक्ताओं को बायोमैट्रिक्स मशीन से राशन सामग्री का वितरण करने की कवायद की जा रही है। पाली में बायोमैट्रिक्स प्रणाली का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए फिलहाल जिले की तीन उचित मूल्य की दुकानों पर यह व्यवस्था लागू की गई है। इनमें से दो दुकानें शहरी क्षेत्र में तथा एक ग्रामीण क्षेत्र से ली गई है। इंजीनियर्स द्वारा पूर्व में दिए गए डेमो के बाद प्रशासन ने इस सिस्टम को उचित मूल्य की दुकानों पर भी लागू करने का फैसला किया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत शहर के वार्ड नंबर 3 41 के अलावा हेमावास गांव की उचित मूल्य की दुकान पर बायोमैट्रिक्स मशीन लगाई गई है। शेष| पेज 15



इनदुकानों पर बायोमैट्रिक मशीन से ही राशन विक्रेताओं द्वारा उपभोक्ताओं को राशन सामग्री दी जा रही है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व प्रशासन ने जिले के 5 स्कूलों में भी दानदाताओं के सहयोग से बायोमैट्रिक मशीन से स्कूली विद्यार्थियों की उपस्थित दर्ज करने का प्रयोग किया है। सरकार से स्वीकृति मिलने पर इस प्रोजेक्ट को जिले के सभी सरकारी स्कूलों में भी लागू किया जाएगा।

कालाबाजारी पर लगेगा अंकुश

उपभोक्ताकी डाटा एंट्री के चलते राशन वितरण व्यवस्था की भी मॉनिटरिंग हो रही है। अप्रत्यक्ष रूप से काला इससे कालाबाजारी पर भी अंकुश लगेगा। रसद विभाग के अनुसार सॉफ्टवेयर बनाने वाले इंजीनियर्स ने प्रशासन को राशन की दुकानों पर बायोमैट्रिक मशीन का डेमो लगाकर उपभोक्ताओं के अनुसार ही राशन वितरण करने की जानकारी दी थी।

ये हैं कुछ खामियां

यहसिस्टम बिजली पर आधारित है। इसलिए बिजली कटौती के दौरान ग्राहकों को बिजली आने तक राशन सामग्री के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। कभी कभी बायोमैट्रिक्स निशान के मिलान में भी बहुत वक्त लगने से ग्राहकों को राशन के लिए काफी देर तक खड़ा रहना पड़ता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को या तो अपनी दिहाड़ी मजदूरी से छुट्टी करनी होती है, या देरी के समय का मानदेय कटवाना होता है। इन परिस्थितियों में संयोगवश तीनों ही उपभोक्ता जिन्होंने बायोमैट्रिक्स रजिस्ट्रेशन करवाया है, और वे श्रमिक हैं तो उनका तो वेतन कटना तय है। यह सिस्टम जीपीएस से संचालित होता है, शहर समेत जिलेभर में इंटरनेट सुविधा पर्याप्त नहीं होने से भी यह सिस्टम फेल हो सकता है।

एफपी