एक ही दिन चला स्मोकिंग के खिलाफ अभियान
महात्मागांधी की जयंती 2 अक्टूबर से पहले जिले को नो स्मोकिंग जोन करने की जिला प्रशासन की सख्ती एक दिन बाद ही बेअसर होकर रह गई है। गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने पूरे जिले में सार्वजनिक स्थलों को नो स्मोकिंग जोन बनाने के लिए 15 सितंबर से सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (कोटपा) के तहत सख्ती से कार्रवाई करने का निर्णय लिया था। इसे लेकर पहले ही दिन औपचारिकता के तौर पर शहर में महज 3-4 लोगों से जुर्माना वसूला गया। इसके अगले ही दिन से मैन पावर और कोर्डिनेशन की कमी के चलते इस कार्रवाई पर ब्रेक लगा दिया गया। कहा जा रहा है कि अब 28 अलग अलग टीमें बनाकर उन्हें पूरे जिले में इस अधिनियम की कड़ाई से पालना कराने के लिए तैनात की जाएंगी। हालांकि अब भी यह साफ नहीं हो पाया है कि यह 28 टीमें कब बनेंगी और कब फिल्ड में जाकर कार्रवाई शुरू करेगी। 15 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के नए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, नहर तिराहा हाउसिंग बोर्ड इलाके में कार्रवाई की। इस दौरान टीम को लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ा। टीम में सदस्य की कमी होने के कारण पूरे दिन मात्र तीन जनों के ही चालान किए जा सके।
अब स्वास्थ्य विभाग ने कलेक्टर को इस अधिनियम की पालना कराने के लिए 28 टीमें गठित करने के संबंध में एक प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा है, लेकिन अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी है। ऐसे में फिलहाल कोटपा-2003 को लेकर सख्ती होना संभव नहीं है।
^हमने तो सभी स्कूल कालेज और सरकारी कार्यालयों में उनकी जरूरत के हिसाब से धूम्रपान विरोधी जानकारी देने वाले बैनर भिजवा दिए थे। यह उन लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि वे इसे सही तरीके से और उचित जगहों पर इन्हें लगवाएं। वैसे हम उन सभी को फिर से इस बारे में याद दिलाएंगे। हम नए सिरे से सख्ती के साथ इस अभियान को चलाने के लिए कमर कस चुके हैं। -केसी सैनी, कॉर्डिनेटर,चिकित्सा विभाग
कहां गए धूम्रपान विरोधी बैनर पोस्टर
15सितंबर को यह निगम को पहली बार सख्ती से अमल में लाने से पहले स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी सरकारी दफ्तरों, स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक जगहों पर लाखों रुपए की लागत से 2500 से ज्यादा अच्छी क्वालिटी वाले बैनर छपवाकर भेजे गए। इसमें से स्कूल कॉलेजों में 1500 बैनर पोस्टर भिजवाए गए जबकि सरकारी दफ्तरों में 100-100 पोस्टर भिजवाए गए। पहले दिन कुछ एक जगह पर